SEBI ने उन ऑफशोर कंपनियों के खिलाफ व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearings) शुरू कर दी है, जिन्होंने जनवरी 2023 की Hindenburg रिपोर्ट से पहले Adani के शेयरों को शॉर्ट-सेल किया था। रेगुलेटर इन कंपनियों से **$2.22 करोड़** का मुनाफा रिकवर करने की तैयारी में है।
बाजार की जांच का नया मोड़
भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर, SEBI ने अब अपना शिकंजा उन विदेशी इकाइयों पर कस दिया है जिन्होंने Hindenburg Research की रिपोर्ट आने से ठीक पहले कथित तौर पर गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल कर Adani Group के शेयरों में शॉर्ट पोजीशन बनाई थी। रेगुलेटर का दावा है कि इन ऑफशोर कंपनियों ने $2.22 करोड़ का अनुचित मुनाफा कमाया है, जिसे अब वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कौन सी कंपनियां हैं निशाने पर?
इस मामले में Kingdon Capital Management और मॉरीशस स्थित K India Opportunities Fund Class F का नाम प्रमुखता से सामने आया है। SEBI का मानना है कि इन कंपनियों ने बाजार में हेरफेर और नियमों का उल्लंघन किया है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई Adani Group पर लगे पहले के आरोपों से अलग है। सितंबर 2025 में SEBI पहले ही Adani Group को उन पुराने आरोपों से क्लीन चिट दे चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कानूनी जंग
SEBI अब इस पैसे को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों का रुख कर चुका है। मॉरीशस में चल रही दिवालियापन (Insolvency) कार्यवाही में SEBI ने हस्तक्षेप किया है और वहां के रिसीवर Quantuma से फंड्स के ट्रांसफर को रोकने की मांग की है। यह देखना दिलचस्प होगा कि रेगुलेटर भारतीय सीमा से बाहर स्थित संपत्तियों को फ्रीज करने में कितना सफल होता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह मामला भारत में काम करने वाले Foreign Portfolio Investors (FPIs) के लिए एक बड़ी चेतावनी है। रेगुलेटर अब टैक्स-हेवन देशों से संचालित होने वाले फंड्स की ओनरशिप और ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी पर बारीकी से नजर रख रहा है। आने वाले समय में ऑफशोर निवेश के लिए सख्त डिस्क्लोजर नियमों का ऐलान संभव है।
