SEBI का बड़ा फैसला! अब स्टॉक एक्सचेंज सुलझाएंगे निवेशकों के विवाद, जानें क्या बदलेगा?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला! अब स्टॉक एक्सचेंज सुलझाएंगे निवेशकों के विवाद, जानें क्या बदलेगा?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों की शिकायतों के निपटारे के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। अब ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) फ्रेमवर्क को सीधे स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी के तहत लाया जाएगा। इस कदम से शिकायतों का समाधान तेज होगा और आर्बिट्रेशन (Arbitration) फैसलों को लागू कराना आसान होगा।

Detailed Coverage

विवाद समाधान में तेजी का वादा

SEBI ने अपने ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) सिस्टम में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की घोषणा की है। अब तक, ये प्रक्रियाएं निजी ODR संस्थानों द्वारा संभाली जाती थीं। लेकिन, अब इन्हें मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) जैसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), और केंद्रीय डिपॉजिटरी को सौंपा जाएगा। SEBI का मानना है कि इससे निवेशकों की शिकायतों को सुलझाने का एक ज्यादा प्रभावी रास्ता बनेगा।

शिकायतों के निपटारे पर असर

पहले, निजी ODR संस्थानों को आर्बिट्रेशन अवार्ड्स (Arbitration Awards) लागू कराने में दिक्कतें आती थीं, क्योंकि उनका सीधे तौर पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स पर रेगुलेटरी कंट्रोल नहीं था। अब, स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी की मदद से SEBI उम्मीद करता है कि आर्बिट्रेशन के फैसलों का सख्ती से पालन होगा।

निवेशकों के लिए यह प्रक्रिया और भी सुगम हो जाएगी। SEBI कंप्लेंट रिड्रेस सिस्टम (SCORES) से अनसुलझी शिकायतें सीधेconciliation (समाधान) स्टेज में जाएंगी। इसके अलावा, नए नियमों के तहत निवेशकों को आधिकारिक पैनल से आर्बिट्रेटर्स (Arbitrators) चुनने में ज्यादा अधिकार मिलेगा। बेकार की या लंबी अपीलों को हतोत्साहित करने के लिए, नए ढांचे में आर्बिट्रल अवार्ड के खिलाफ अपील करने वाले पक्षों को अवार्ड की राशि का एक हिस्सा जमा करना होगा। खास तौर पर, नए नियम एक अंतरिम राहत (Interim Relief) का प्रावधान लाते हैं, जिसके तहत अपील प्रक्रिया के दौरान ₹5 लाख या अवार्ड मूल्य का 50% (जो भी कम हो) जमा करना होगा।

पेशेवर मानकों को बनाए रखना

आर्बिट्रेटर्स की गुणवत्ता और स्वतंत्रता से जुड़ी पिछली चिंताओं को दूर करने के लिए, SEBI ने पात्रता मानदंड को और स्पष्ट कर दिया है। अब conciliators या arbitrators के रूप में कार्य करने वाले व्यक्तियों की आयु 40 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए, उनके पास कानून या फाइनेंस में कम से कम 10 साल का पेशेवर अनुभव होना चाहिए, और उन्हें सिक्योरिटीज मार्केट के तकनीकी ज्ञान का प्रदर्शन करना होगा।

हालांकि इंडस्ट्री ने MII-आधारित समाधान की ओर बढ़ने का काफी समर्थन किया है, लेकिन कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स अभी भी इस बात पर नजर रख रहे हैं कि ये बदलाव अंतरराष्ट्रीय पक्षों से जुड़े जटिल, क्रॉस-बॉर्डर विवादों पर कैसे लागू होंगे। यह बदलाव SEBI की निवेशकों की शिकायतों के बैकलॉग को कम करने और वित्तीय इकोसिस्टम में जवाबदेही बढ़ाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। निवेशकों के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम स्टॉक एक्सचेंज द्वारा नए आर्बिट्रेटर पैनलों और इन विवादों के प्रबंधन के लिए डिजिटल इंटरफेस के संबंध में जारी किए जाने वाले विशिष्ट परिचालन दिशानिर्देश होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.