बाजार नियामक SEBI ने Nifty Bank Index में कथित हेरफेर की जांच के सिलसिले में Jane Street Group को महत्वपूर्ण ट्रेड लॉग्स सौंप दिए हैं। हालांकि, डेटा मिलने के बावजूद कंपनी अभी भी भारतीय बाजारों से बाहर है और SAT में कानूनी लड़ाई जारी है।
जांच में नया मोड़
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए Jane Street Group के साथ ट्रेड से जुड़े डेटा साझा किए हैं। इन लॉग्स में ट्रेड का समय (Timestamp), क्वांटिटी और प्राइसिंग जैसी जानकारियां शामिल हैं। कंपनी लंबे समय से इन सबूतों की मांग कर रही थी ताकि रेगुलेटर के अंतरिम आदेश को चुनौती दी जा सके।
विवाद की जड़ और ₹4,843 करोड़ का एस्क्रो
यह मामला जुलाई 2025 से सुर्खियों में है, जब SEBI ने कंपनी पर Nifty Bank Index में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। रेगुलेटर का कहना है कि कंपनी ने हाई-वॉल्यूम ट्रेडिंग के जरिए इंडेक्स की कीमतों को प्रभावित करके अनुचित मुनाफा कमाया। इस मामले में अनुपालन दिखाते हुए कंपनी पहले ही ₹4,843 करोड़ की भारी-भरकम राशि एक एस्क्रो अकाउंट में जमा कर चुकी है, लेकिन फिलहाल उनकी ट्रेडिंग गतिविधियां भारत में रुकी हुई हैं।
कानूनी दांव-पेच
अब लड़ाई इस बात पर है कि क्या Jane Street को SEBI और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच हुई आंतरिक बातचीत तक पहुंच मिलनी चाहिए। कंपनी का तर्क है कि अपना पक्ष रखने के लिए यह दस्तावेज जरूरी हैं, जबकि SEBI का मानना है कि यह केवल कार्यवाही में देरी करने की कोशिश है।
मार्केट पर असर
यह मामला हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्मों पर हो रही सख्त निगरानी को दर्शाता है। सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में चल रही सुनवाई का परिणाम न केवल इस कंपनी के लिए, बल्कि भारत के डेरिवेटिव मार्केट में ऑटोमेटेड ट्रेडिंग के भविष्य के लिए एक बड़ा नजीर साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं जहां दस्तावेजों के खुलासे की सीमा तय की जाएगी।
