SEBI ने Accredited Investor का दर्जा पाने के लिए **₹5 करोड़** की नई लिमिट तय की है। अब फंड मैनेजर सीधे अपने क्लाइंट्स को मान्यता दे सकेंगे, जिससे निवेश प्रक्रिया और पेपरवर्क आसान हो जाएगा।
नियम में बड़ा बदलाव
SEBI ने Accredited Investor के फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव किया है। अब इंडिविजुअल्स, HUF, फैमिली ट्रस्ट और सोल प्रोप्राइटरशिप को इस स्टेटस के लिए कम से कम ₹5 करोड़ की सिक्योरिटी मार्केट एसेट्स दिखानी होंगी। वहीं, बॉडी कॉरपोरेट्स के लिए यह लिमिट ₹20 करोड़ रखी गई है।
फंड मैनेजरों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
अब मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे मैनेजर-लेड (Manager-led) बना दिया गया है। AIF, PMS और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड के मैनेजर अब खुद अपने क्लाइंट्स को सीधे Accredited Investor के रूप में मान्यता दे सकेंगे। इससे पहले की जटिल वेरिफिकेशन प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई से निवेशकों को राहत मिलेगी।
पोर्टेबिलिटी और वैलिडिटी
एक बार मान्यता मिलने के बाद यह स्टेटस 3 साल के लिए वैध रहेगा। साथ ही, SEBI ने 'पोर्टेबिलिटी' की सुविधा भी दी है, जिससे एक ही फाइनेंशियल ग्रुप के अलग-अलग प्रोडक्ट्स में निवेशक इसी स्टेटस का उपयोग कर सकेंगे।
विदेशी निवेशकों के लिए रास्ता साफ
इस नए नियमों में विदेशी निवेशकों को भी बड़ी सहूलियत दी गई है। FEMA के तहत भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों को अब ऑटोमैटिकली Accredited माना जाएगा, जिससे विदेशी पूंजी का प्रवाह आसान हो सके। इसके अलावा, LLPs को भी इसमें शामिल किया गया है, बशर्ते उनके पार्टनर्स निर्धारित क्राइटेरिया को पूरा करते हों।
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह कदम अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट के दायरे को गहरा करेगा। हालांकि, निवेशकों को याद रखना चाहिए कि ये स्पेशलाइज्ड फंड्स पब्लिक इक्विटी मार्केट की तुलना में अलग रिस्क और लिक्विडिटी प्रोफाइल के साथ आते हैं।
