SEBI कथित तौर पर डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को एक साल के लिए सस्पेंड करने की तैयारी में है। एक्सपायरी के दिन बढ़ती अस्थिरता और निवेशकों की शिकायतों के बाद रेगुलेटर ने यह कदम उठाया है।
मार्केट रेगुलेटर SEBI अब डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को रोकने की योजना बना रहा है। उम्मीद है कि यह बदलाव उस अस्थिरता को कम करेगा, जिसने अगस्त 2026 में इस सिस्टम के लॉन्च के बाद से ट्रेडर्स और निवेशकों को काफी परेशान किया था। खबरों के मुताबिक, रेगुलेटर अब डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए पुराने 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस' (VWAP) तरीके पर वापस लौटने जा रहा है, जो कम से कम 1 साल तक प्रभावी रहेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
3 अगस्त 2026 को पेश किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का उद्देश्य F&O शेयरों के लिए ट्रेडिंग दिन के अंत में बेहतर प्राइस डिस्कवरी करना था। हालांकि, यह सिस्टम जल्द ही विवादों में घिर गया। खासकर मंथली एक्सपायरी के दिनों में कीमतों में अचानक और अनपेक्षित उतार-चढ़ाव देखने को मिले, जिससे ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन मैनेज करने में भारी दिक्कत हुई।
पब्लिक फीडबैक और मार्केट रिस्पॉन्स
रेगुलेटर के पास 3 अक्टूबर 2026 तक चले कंसल्टेशन प्रोसेस में कुल 20,000 सार्वजनिक कमेंट्स आए, जो इस व्यवस्था के खिलाफ मार्केट का गुस्सा जाहिर करने के लिए काफी थे। इस खबर का असर 6 अक्टूबर 2026 को बाजार पर भी दिखा। स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
कैश मार्केट के लिए क्या नियम हैं?
ध्यान देने वाली बात यह है कि कैश मार्केट के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन अभी भी जारी रहेगा। रेगुलेटर का मानना है कि अंडरलाइंग स्टॉक्स की उचित क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए यह एक प्रभावी टूल बना हुआ है। अब बाजार की नजरें एक्सचेंज से आने वाले उस ऑफिशियल सर्कुलर पर हैं, जो इस बदलाव की टाइमलाइन और टेक्निकल डिटेल्स को स्पष्ट करेगा।
