SEBI ने स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी के लिए डायरेक्टर की नियुक्ति के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद एक्सपर्ट्स के दायरे को बढ़ाना है, साथ ही चार अहम मैनेजमेंट पदों के लिए सख्त योग्यता और हायरिंग टाइमलाइन तय की गई है।
गवर्नेंस और एक्सपर्ट्स की जरूरत
SEBI ने मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के लिए गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स को अपडेट करने की कवायद शुरू की है। देश के स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी कैपिटल मार्केट की रीढ़ हैं। अभी तक डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर काफी कड़े नियम थे, जिससे बड़ी फाइनेंशियल कंपनियों के दिग्गज एक्सपर्ट्स को बोर्ड में शामिल करने में बाधा आती थी।
क्या बदलेगा नियमों में?
अब SEBI इन नियमों को लचीला बनाने की तैयारी में है। जो छूट फिलहाल सरकारी संस्थाओं को मिलती है, वही अब 'Widely Held' निजी कंपनियों को भी देने का प्रस्ताव है। नियम के मुताबिक, अगर किसी कंपनी के किसी सिंगल शेयरहोल्डर (सरकारी संस्थाओं को छोड़कर) की हिस्सेदारी 10% से कम है, तो उन्हें राहत मिलेगी। इससे 'पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर' के लिए टैलेंट पूल काफी बड़ा हो जाएगा।
मैनेजमेंट पदों के लिए सख्त गाइडलाइन्स
SEBI ने चार महत्वपूर्ण पदों के लिए एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क तय करने का फैसला लिया है:
- Chief Technology Officer (CTO)
- Chief Information Security Officer (CISO)
- Compliance Officer
- Chief Risk Officer
इन पदों के लिए अब स्पष्ट योग्यता और एक्सपीरियंस की अनिवार्यता होगी। साथ ही, किसी भी वैकेंसी को 3 महीने के भीतर भरना अनिवार्य होगा। ट्रांजिशन के दौरान काम न रुके, इसके लिए हर फंक्शन के लिए 'डिप्टी' की नियुक्ति का भी सुझाव दिया गया है।
चुनौतियां और डेडलाइन
इन बदलावों से गवर्नेंस तो सुधरेगी, लेकिन कंपनियों को इंटरनल कंट्रोल पर और ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट न हो। बाजार के जानकार 30 सितंबर, 2026 तक इन प्रस्तावों पर अपनी राय दे सकते हैं, जिसके बाद SEBI फाइनल नियम जारी करेगा।
