डिजिटल फाइनेंशियल फ्रॉड (digital financial fraud) के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। SEBI ने अब SEBI-पंजीकृत इंटरमीडियरीज़ (जैसे ब्रोकर्स और म्यूचुअल फंड) के लिए खास "@valid" UPI हैंडल का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है।
यह नियम 1 अक्टूबर, 2025 से लागू होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी ये "@valid" हैंडल, जैसे ब्रोकर्स के लिए '.brk@valid' या म्यूचुअल फंड के लिए '.mf@valid', लेन-देन के दौरान एक खास 'हरे त्रिभुज में अंगूठे का निशान' (thumbs-up inside a green triangle) के साथ दिखाई देंगे, जिससे लेन-देन की प्रामाणिकता की पुष्टि होगी। इसके अलावा, 'SEBI Check' प्लेटफॉर्म के ज़रिए निवेशक फंड भेजने से पहले UPI ID और बैंक डिटेल्स को वेरीफाई (verify) कर सकेंगे।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब UPI फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ UPI फ्रॉड के 7.25 लाख मामले सामने आए थे और ₹573 करोड़ का नुकसान हुआ था, वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 13.42 लाख केस और ₹1,087 करोड़ तक पहुंच गया।
डिजिटल पेमेंट, खासकर UPI के तेजी से विस्तार के साथ, धोखाधड़ी करने वालों के लिए भी नए अवसर पैदा हुए हैं। स्कैमर्स (scammers) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दे रहे हैं, जिसमें AI-पावर्ड पहचान छिपाना (impersonation), एडवांस्ड फिशिंग (phishing) और फेक कस्टमर सपोर्ट शामिल हैं। CERT-In की एक रिपोर्ट के अनुसार, 38% फिनटेक फ्रॉड (fintech frauds) का कारण फिशिंग ही है, जिसमें अक्सर रेगुलेटर्स (regulators) या बैंकों का रूप धारण किया जाता है।
इन नए सुरक्षा उपायों के बावजूद, जोखिम बना हुआ है। फंड रिकवर (recover) करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि रिपोर्ट बताती हैं कि फ्रॉड चार्ज्बैक (fraud chargebacks) के केवल लगभग 6% मामले ही सफलतापूर्वक रिकवर हो पाते हैं। धोखाधड़ी की गति, कानूनी प्रक्रियाओं की धीमी गति से कहीं ज़्यादा तेज़ है। इसलिए, निवेशकों को सतर्क रहने और इन नए सुरक्षा फीचर्स का समझदारी से इस्तेमाल करने की ज़रूरत है।
SEBI का "@valid" UPI हैंडल और 'SEBI Check' टूल एक ज़रूरी सुरक्षा कवच हैं, लेकिन फ्रॉड के तरीके लगातार बदल रहे हैं। भविष्य में रेगुलेटर्स को रियल-टाइम डिटेक्शन (real-time detection), त्वरित विवाद समाधान (dispute resolution) और जन जागरूकता (public awareness) पर भी ध्यान देना होगा, ताकि निवेशक नए स्कैम तरीकों के प्रति जागरूक रहें।
