SEBI के चेतावनी सर्कुलर हुए बेअसर, डेरिवेटिव्स में **87.7%** रिटेल ट्रेडर्स को हुआ भारी नुकसान

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI के चेतावनी सर्कुलर हुए बेअसर, डेरिवेटिव्स में **87.7%** रिटेल ट्रेडर्स को हुआ भारी नुकसान

SEBI की तमाम सख्ती और चेतावनी के बावजूद डेरिवेटिव्स बाजार में रिटेल ट्रेडर्स की हालत खस्ता है। फाइनेंशियल ईयर **2026** में **87.7%** ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा है। कुल घाटा भले ही कम होकर **₹91,685 करोड़** रहा हो, लेकिन इसके पीछे की वजह निवेशकों की सफलता नहीं, बल्कि मार्केट से **18%** ट्रेडर्स का बाहर निकल जाना है।

आंकड़ों का सच और बढ़ता रिस्क

SEBI ने रिटेल निवेशकों को बचाने के लिए ट्रेडिंग ऐप्स पर डायनामिक रिस्क वॉर्निंग (Risk Warnings) और कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाने जैसे कदम उठाए थे, लेकिन ये उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल कुल नुकसान ₹1.12 लाख करोड़ था, जो इस बार कम होकर ₹91,685 करोड़ पर आ गया है। पर गौर करने वाली बात यह है कि यह कमी निवेशकों के प्रदर्शन में सुधार के कारण नहीं, बल्कि मार्केट से 18% ट्रेडर्स के बाहर हो जाने के चलते आई है। जो ट्रेडर्स टिके हुए हैं, उन पर संकट और गहरा गया है; औसतन प्रति ट्रेडर नुकसान ₹1.13 लाख से बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया है।

क्यों बढ़ रही है मुश्किल?

नुकसान की एक बड़ी वजह केवल खराब ट्रेड नहीं, बल्कि ट्रांजेक्शन की लागत भी है। अप्रैल 2026 में ऑप्शंस प्रीमियम पर STT (Securities Transaction Tax) को बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया, जिससे ब्रेक-इवन (Break-even) करना और भी मुश्किल हो गया है। ब्रोकरेज फीस और एक्सचेंज चार्जेस के कारण रिटेल निवेशकों की पूंजी बहुत तेजी से साफ हो रही है।

क्या चेतावनी काफी है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल पॉप-अप अलर्ट्स से ट्रेडर्स का व्यवहार नहीं बदलने वाला। जब तक सिस्टम में एंट्री के लिए सख्त नियम जैसे अनिवार्य सर्टिफिकेशन या नेट-वर्थ की शर्त नहीं लागू होती, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या SEBI अब एडवाइजरी के बजाय कड़े स्ट्रक्चरल बैरियर्स की ओर कदम बढ़ाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.