SEBI ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। ओपन इंटरेस्ट उल्लंघन (Open Interest violation) के लिए अब अधिकतम जुर्माना **₹2 लाख** तय कर दिया गया है।
सेबी (SEBI) ने 9 सितंबर 2026 को कमोडिटी मार्केट के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए एक नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत पोजीशन लिमिट (Position Limit) के मैनेजमेंट और जुर्माने के नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है।
जुर्माने का नया गणित
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई क्लाइंट निर्धारित लिमिट से ज्यादा 'ओपन इंटरेस्ट' रखता है, तो उस पर अधिकतम ₹2 लाख का जुर्माना लगेगा। अगर उल्लंघन लिमिट के 2% के दायरे में है, तो पेनाल्टी ₹10,000 फिक्स की गई है। यह 2017 से चले आ रहे पुराने सिस्टम की जगह लेगा, जिससे मार्केट में ज्यादा स्पष्टता आएगी।
लिमिट में बड़ी राहत
सेबी ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए पोजीशन लिमिट को दोगुना कर दिया है:
- ब्रॉड कमोडिटीज (Broad Commodities): लिमिट बढ़ाकर 2% की गई है।
- नैरो कमोडिटीज (Narrow Commodities): अब लिमिट 1% होगी।
- सेंसिटिव कमोडिटीज (Sensitive Commodities): यहां लिमिट 0.5% तय की गई है।
साथ ही, 'ब्रॉड कमोडिटी' के दर्जे के लिए क्राइटेरिया को आसान बनाया गया है। अब एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट को ब्रॉड कैटेगरी में आने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन की सप्लाई या ₹5,000 करोड़ की वैल्यू, दोनों में से कोई एक शर्त पूरी करनी होगी।
सख्ती भी बरकरार
बाजार में अनुशासन बनाए रखने के लिए सेबी ने सख्त कदम भी उठाए हैं। अगर कोई मेंबर एक महीने में 3 बार से ज्यादा 2% से ऊपर का उल्लंघन करता है, तो एक्सचेंज को उस सदस्य की पोजीशन 'स्क्वायर-ऑफ' (Square-off) करानी होगी। इसके अलावा, बार-बार नियम तोड़ने पर इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में अतिरिक्त जुर्माना जमा करना होगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़ी पोजीशन लिमिट से मार्केट में एक्टिविटी तो बढ़ेगी, लेकिन निवेशकों को बढ़ती वॉलिटिलिटी (Volatility) के प्रति सावधान रहना चाहिए। सभी मार्केट पार्टिसिपेंट्स को अपने कंप्लायंस सिस्टम को इन नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा ताकि किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
