3 सितंबर 2026 को Sensex के क्लोजिंग ऑक्शन में **2,100 पॉइंट्स** की भारी गिरावट देखी गई। इस अचानक आई वोलेटिलिटी और डेरिवेटिव्स एक्सपायरी पर ऑप्शंस प्रीमियम में उछाल के बाद अब SEBI ने सेटलमेंट नियमों की समीक्षा करने का फैसला लिया है।
3 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में कारोबार के अंतिम मिनटों में भारी अस्थिरता देखने को मिली। क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान Sensex में अचानक 2,100 पॉइंट्स से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतों में जबरदस्त हलचल मच गई। यह उथल-पुथल वीकली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन हुई, जब ट्रेडर्स अपनी पोजीशन बंद कर रहे थे, जिससे बाजार और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया था।
क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान वोलेटिलिटी
3 अगस्त 2026 को शुरू किया गया 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' का मुख्य उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाना था। हालांकि, गुरुवार के सत्र में अंतिम मिनटों में लिक्विडिटी कम होने के कारण यह मैकेनिज्म लड़खड़ा गया। इस वोलेटिलिटी का असर डेरिवेटिव्स मार्केट पर इतना गहरा रहा कि महज 2 मिनट के भीतर पुट ऑप्शन प्रीमियम 400 से 500 प्रतिशत तक बढ़ गए। हालांकि इंडेक्स बाद में निचले स्तरों से रिकवर हुआ, लेकिन इस घटना ने मार्केट मेकर्स और ट्रेडर्स के लिए जोखिम को उजागर कर दिया है।
सेटलमेंट प्रोसेस पर रेगुलेटर की नजर
इस घटना के बाद, SEBI ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के तरीके की औपचारिक समीक्षा शुरू कर दी है। रेगुलेटर इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि क्या क्लोजिंग ऑक्शन से तय होने वाली कीमत सेटलमेंट के लिए सबसे स्थिर आधार है। SEBI ने संकेत दिया है कि अगले एक हफ्ते के भीतर संभावित स्ट्रक्चरल बदलावों पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह घटना अंतिम मिनटों में ट्रेडिंग करने के खतरों को दर्शाती है। अब सबकी नजरें रेगुलेटर के उस कंसल्टेशन पेपर पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि भविष्य में ऑर्डर्स का एग्जीक्यूशन और सेटलमेंट किस तरह होगा।
