SEBI का बड़ा कदम: नॉन-एग्री कमोडिटी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए बदले जा रहे नियम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SEBI का बड़ा कदम: नॉन-एग्री कमोडिटी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए बदले जा रहे नियम

SEBI अब नॉन-एग्री कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए पोजिशन लिमिट्स की समीक्षा कर रही है। इस कदम का मुख्य मकसद बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना और ट्रेडर्स के लिए कामकाज आसान बनाना है।

मार्केट रेगुलेटर SEBI अब नॉन-एग्री कमोडिटी सेगमेंट में हलचल बढ़ाने की तैयारी में है। हाल ही में चेयरमैन तुहीन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स को और अधिक सुलभ बनाने के लिए रेगुलेटर पोजिशन लिमिट्स में बदलाव करने जा रहा है। इसका सीधा फायदा कमर्शियल यूजर्स और प्रोसेसर्स को मिलेगा, जो अपनी रिस्क मैनेजमेंट के लिए एक्सचेंज का रुख करते हैं।

पिछले फैसलों का असर

आपको याद होगा कि 9 सितंबर 2026 को SEBI ने एग्री कमोडिटीज के लिए बड़े बदलाव किए थे, जिसमें ब्रॉड कमोडिटीज के लिए 2%, नैरो के लिए 1% और सेंसिटिव के लिए 0.5% की लिमिट तय की गई थी। अब इसी तरह का संतुलित नजरिया मेटल और एनर्जी जैसे नॉन-एग्री प्रोडक्ट्स के लिए अपनाया जाएगा।

क्यों है यह बदलाव जरूरी?

बाजार में लिक्विडिटी कम होने से बड़े ट्रेडर्स को ऑर्डर एग्जीक्यूट करने में दिक्कत आती है और कीमतों में बेवजह उतार-चढ़ाव (Price Swings) देखने को मिलते हैं। इन लिमिट्स को रीकैलिब्रेट करने से बड़े हेजर्स को बाजार में आने की अधिक आजादी मिलेगी। साथ ही, SEBI अब GST से जुड़ी उन तकनीकी मुश्किलों को भी हल करने पर काम कर रहा है, जो फिजिकल डिलीवरी के दौरान बाधा बनती हैं।

निवेशकों के लिए सावधानी

भले ही बाजार को आसान बनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन रेगुलेटर मार्जिन और रिपोर्टिंग को लेकर सख्त बना रहेगा। ट्रेडर्स को आने वाले दिनों में नए सिस्टम और सेटलमेंट फ्रेमवर्क के हिसाब से खुद को ढालना होगा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स को अब SEBI के उस आधिकारिक सर्कुलर का इंतजार है, जिसमें लिमिट्स और इनके लागू होने की तारीखों का खुलासा होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.