SEBI IPO Rules: IPO और FPO लाने वाली कंपनियों के लिए अब और सख्त होंगे नियम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SEBI IPO Rules: IPO और FPO लाने वाली कंपनियों के लिए अब और सख्त होंगे नियम

SEBI ने Primary Markets Advisory Committee के जरिए IPO और FPO से जुड़े नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है। बीते फाइनेंशियल ईयर में कंपनियों ने करीब **₹1.9 लाख करोड़** जुटाए हैं, जिसके बाद अब रेगुलेटर क्वालिटी और वैल्यूएशन पर कड़ा पहरा बिठाने की तैयारी में है।

नियम क्यों सख्त कर रहा है SEBI?

रेगुलेटर का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जो कंपनियां पब्लिक मार्केट में पैसा जुटाने आ रही हैं, वे आर्थिक रूप से कितनी मजबूत हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर में रिकॉर्ड ₹1.9 लाख करोड़ की फंडरेजिंग हुई है, जिसे देखते हुए SEBI किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता। PMAC की एक नई सब-ग्रुप, लिस्टिंग से जुड़े एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और वैल्यूएशन सेफगार्ड्स की बारीकी से जांच करेगी। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है क्योंकि अब कंपनियों के लिए IPO लाना पहले जितना आसान नहीं होगा और एग्रेसिव वैल्यूएशन पर लगाम लगेगी।

क्या है मास्टर प्लान?

यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है। इससे पहले SEBI ने SME IPO सेगमेंट में भी इसी तरह की सख्ती दिखाई थी, जहां कंपनियों के लिए प्रॉफिटेबिलिटी और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स को कड़ा कर दिया गया था। अब इसी लॉजिक को मेनबोर्ड पर भी लागू किया जा सकता है। रेगुलेटर 2018 के फ्रेमवर्क के बाद लिस्ट हुई कंपनियों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर रहा है ताकि उन खामियों को दूर किया जा सके, जिनका फायदा उठाकर कमजोर कंपनियां बाजार में एंट्री कर रही थीं।

आने वाले समय में जब ये नए नियम लागू होंगे, तो वे IPO के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट करेंगे। यह स्पष्ट है कि SEBI अब मार्केट विस्तार की रफ्तार से ज्यादा निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.