भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अगस्त 2026 में लागू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) पर मिले फीडबैक की सक्रिय रूप से समीक्षा कर रहा है। हालांकि रेगुलेटर का लक्ष्य भारतीय बाजारों को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाना है, लेकिन इस बदलाव के शुरुआती दौर में लिक्विडिटी (liquidity) में कमी और विभिन्न एक्सचेंजों पर कीमतों में अंतर जैसी चुनौतियाँ सामने आई हैं। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि यह बदलाव ट्रेड एक्जीक्यूशन (trade execution) और म्यूचुअल फंड वैल्यूएशन (mutual fund valuation) को कैसे प्रभावित करता है, क्योंकि सिस्टम लगातार एडजस्ट हो रहे हैं।
क्लोजिंग प्राइस में बदलाव को समझें
SEBI फिलहाल नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन कर रहा है, जिसे 3 अगस्त, 2026 को लागू किया गया था। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने पुष्टि की है कि रेगुलेटर व्यापारियों और बाजार सहभागियों द्वारा उठाई गई चिंताओं से अवगत है, लेकिन इस सिस्टम का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस (closing price) निर्धारित करने के तरीके में सुधार करना है। इसका लक्ष्य भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में इस्तेमाल होने वाले वैश्विक मानकों की ओर ले जाना है, जहां नीलामी-आधारित मूल्य निर्धारण आम है।
पहले, किसी स्टॉक का क्लोजिंग प्राइस दिन के आखिरी 30 मिनट के औसत प्राइस से कैलकुलेट होता था। नई CAS प्रणाली इसे बदलकर एक नीलामी-आधारित इक्विलिब्रियम प्राइस (equilibrium price) का उपयोग करती है। इस सिस्टम में, खरीदे और बेचे जाने वाले ऑर्डर्स को एक ऐसे सिंगल प्राइस पर मैच किया जाता है जो अधिकतम ऑर्डर्स को संतुष्ट करे। इसका उद्देश्य दिन के लिए अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष क्लोजिंग प्राइस बनाना है, जिससे आखिरी मिनट में कीमतों में हेरफेर की संभावना कम हो सके।
शुरुआती बाजार की चुनौतियों का सामना
पारदर्शिता में सुधार के दीर्घकालिक उद्देश्य के बावजूद, यह बदलाव बिना किसी रुकावट के नहीं रहा है। शुरुआती दौर में, कम पार्टिसिपेशन (participation) के कारण कुछ स्टॉक्स में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के बीच प्राइस में अंतर देखा गया। लिक्विडिटी - यानी बड़ी प्राइस मूवमेंट किए बिना शेयरों को आसानी से खरीदने और बेचने की क्षमता - भी फोकस का एक बिंदु रही है। SEBI ने नोट किया है कि ये मुद्दे काफी हद तक ट्रांजीशन (transition) प्रक्रिया का हिस्सा हैं, क्योंकि ट्रेडर्स, ब्रोकर्स और एल्गोरिदम क्लोजिंग प्राइस की गणना के नए तरीके के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।
बढ़ती भागीदारी और सिस्टम का अनुकूलन
बाजार को एडजस्ट करने में मदद करने के लिए, Zerodha, Upstox, Groww, ICICI Securities और Angel One जैसे प्रमुख ब्रोक्रेज फर्मों ने अपने प्लेटफॉर्म पर संभावित CAS प्राइस दिखाना शुरू कर दिया है। इससे ट्रेडर्स को सेशन खत्म होने से पहले संभावित क्लोजिंग प्राइस को समझने में मदद मिलती है। डेटा इंगित करता है कि संस्थागत भागीदारी बढ़ रही है, जिसमें म्यूचुअल फंड (mutual fund) की भागीदारी लगभग 20% से 25% तक पहुंच गई है। यह बताता है कि जैसे-जैसे बाजार सहभागियों को नीलामी प्रक्रिया की अधिक जानकारी होगी, भागीदारी का स्तर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों को स्थिर करने और एक्सचेंजों के बीच देखे गए अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण पहलू इन सिस्टम के निरंतर एकीकरण की निगरानी करना है। जैसे-जैसे ब्रोकर प्लेटफॉर्म रियल-टाइम इंडिकेटिव प्राइस (indicative price) दिखाने के लिए अपने टूल्स को परिष्कृत करते हैं, ट्रेडिंग का अनुभव अधिक सुचारू होने की संभावना है। मुख्य बात यह देखना बाकी है कि जैसे-जैसे अधिक निवेशक और एल्गोरिथम सिस्टम इस नए मानक को पूरी तरह से अपनाते हैं, CAS मैकेनिज्म आपूर्ति और मांग को कितनी प्रभावी ढंग से संतुलित करता है।
