बाजार में एक्सपायरी के दिन मच रही अफरा-तफरी को देखते हुए SEBI ने 'Closing Auction Session' (CAS) की समीक्षा शुरू कर दी है। टाइमिंग मिसमैच के कारण इंडेक्स में आ रहे बड़े झटकों को रोकने के लिए अब रेगुलेटर कंसल्टेशन पेपर लाएगा।
मार्केट में क्यों मची खलबली?
3 अगस्त 2026 से लागू किए गए 'Closing Auction Session' का उद्देश्य मार्केट में पारदर्शिता लाना था। यह सेशन 3:15 PM से 3:30 PM तक चलता है और क्लोजिंग प्राइस 3:35 PM पर तय होता है। लेकिन, समस्या तब खड़ी हो रही है जब डेरिवेटिव्स मार्केट 3:40 PM तक खुला रहता है।
इस 5 मिनट के गैप ने लिक्विडिटी का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। कैश मार्केट बंद होने के बावजूद डेरिवेटिव्स में ट्रेड जारी रहने से इंडेक्स में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। हाल ही में Sensex में करीब 2,000 अंक की अचानक गिरावट या उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
0DTE ऑप्शंस का 'खतरनाक' कनेक्शन
इस वोलेटिलिटी के पीछे एक बड़ी वजह '0DTE ऑप्शंस' (जो उसी दिन एक्सपायर होते हैं) में ट्रेडर्स की बढ़ती दिलचस्पी है। जब बाजार बंद होने के करीब होता है, तो ये ऑप्शंस इंडेक्स को तेजी से ऊपर-नीचे करते हैं। कैश मार्केट में पर्याप्त गहराई न होने के कारण यह 'प्राइस शॉक' सीधे निवेशकों को नुकसान पहुंचा रहा है।
आगे क्या होगा?
SEBI ने अब साफ कर दिया है कि वह सेटलमेंट प्राइस के तरीके को बदलेगा। रेगुलेटर जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा, जिसमें क्लोजिंग टाइमिंग और प्राइस कैलकुलेशन को लेकर नए बदलाव हो सकते हैं। निवेशकों को अब इस पेपर का इंतजार है, क्योंकि इसमें होने वाले बदलाव एक्सपायरी के दिन मार्केट के मूड को पूरी तरह बदल सकते हैं।
