BSE Sensex ने **1,100** से ज्यादा अंकों की छलांग लगाई है। इस तेजी के पीछे बाजार का ध्यान SEBI द्वारा 'Closing Auction Session' (CAS) के नियमों की समीक्षा पर है, जो डेरिवेटिव्स सेटलमेंट में उतार-चढ़ाव की वजह बन रहा है।
भारतीय शेयर बाजार ने 15 अक्टूबर को शानदार वापसी की और बेंचमार्क इंडेक्स Sensex 1,100 अंकों से ज्यादा बढ़कर बंद हुआ। बाजार में यह उत्साह SEBI की 'सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी' की आगामी बैठक को लेकर है। रेगुलेटर फिलहाल 'Closing Auction Session' (CAS) फ्रेमवर्क पर मिल रहे फीडबैक का मूल्यांकन करने जा रहा है। इस मैकेनिज्म को अगस्त में पेश किया गया था ताकि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स वाले शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने में मानकीकरण (Standardization) लाया जा सके।
क्यों हो रही है चर्चा?
CAS सिस्टम को वैश्विक स्तर (US और Hong Kong) के अनुरूप बनाया गया था, लेकिन मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि इसके कारण एक्सपायरी के दिन आखिरी मिनटों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल रहा है। यह अस्थिरता उन ट्रेडर्स के लिए चिंता का विषय है जो डेरिवेटिव्स के जरिए सेटलमेंट करते हैं, क्योंकि क्लोजिंग के ठीक पहले कीमतों में बदलाव सेटलमेंट वैल्यू को प्रभावित करता है।
VWAP बनाम ऑक्शन
बहस का मुख्य केंद्र 'डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस' तय करने का तरीका है। अभी मार्केट 'Volume-Weighted Average Price' (VWAP) पर भरोसा करता है, जिसे निवेशक एक स्थिर और विश्वसनीय तरीका मानते हैं। वहीं, नया ऑक्शन सिस्टम 10 मिनट की क्लोजिंग ऑक्शन विंडो में डिस्कवर हुई कीमत को शामिल करना चाहता है।
रेगुलेटर अब यह देख रहा है कि क्या पुराने सिस्टम को बरकरार रखा जाए, इसे ट्रायल बेसिस पर बढ़ाया जाए या नए सिस्टम को ही लागू किया जाए। फिलहाल, इंडस्ट्री के ज्यादातर लोग VWAP का ही समर्थन कर रहे हैं। निवेशकों को अब SEBI की आगामी बैठक और आधिकारिक फैसलों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी बदलाव ट्रेडिंग पैटर्न को बदल सकता है।
