SEBI ने डेरिवेटिव सेटलमेंट के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को खत्म कर दिया है। अब सेटलमेंट फिर से VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) मेथड से होगा।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। रेगुलेटर ने 3 अगस्त से लागू क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए पुरानी VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) पद्धति को फिर से बहाल कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत, सेटलमेंट की कीमत अब अंतिम 30 मिनट की ट्रेडिंग के दौरान हुए ट्रेड के औसत भाव से तय की जाएगी।\n\nयह कदम बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को कम करने के लिए उठाया गया है। क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के कारण कीमतों में अचानक और बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे थे, जिससे ट्रेडर्स को ऑर्डर एग्जीक्यूट करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इसका सीधा असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ा और NSE और BSE पर वॉल्यूम पिछले 18 महीनों के निचले स्तर तक गिर गए थे।\n\n### ट्रेडर्स को क्या फायदा होगा?\n\nVWAP मॉडल की वापसी से मार्केट में प्रेडिक्टेबिलिटी बढ़ेगी। ऑक्शन के दौरान कुछ चुनिंदा ट्रेडर्स की वजह से क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर की आशंका रहती थी, जिससे आम निवेशकों को अचानक नुकसान उठाना पड़ता था। अब अंतिम 30 मिनट के एवरेज प्राइस का इस्तेमाल होने से बड़े ऑर्डर्स का असर सीमित हो जाएगा, जिससे एक्सपायरी के दिन का माहौल स्थिर रहेगा।\n\nइस फैसले से ब्रोकरेज हाउसेस और एक्सचेंज को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लिक्विडिटी कम होने से ट्रांजैक्शन रेवेन्यू पर असर पड़ रहा था, लेकिन अब आर्बिट्राजर्स और प्रोप-डेस्क ट्रेडर्स के फिर से सक्रिय होने से वॉल्यूम में सुधार की संभावना है।
