SEBI ने Innovators Growth Platform (IGP) के नियमों को आसान बनाने के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर और स्पेस-टेक जैसी कंपनियों की लिस्टिंग को बढ़ावा देना है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपनी Innovators Growth Platform (IGP) को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस प्लेटफार्म का मकसद टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी उन नई कंपनियों को शेयर बाजार तक लाना है, जिन्हें अपनी ग्रोथ के लिए लंबी अवधि तक भारी निवेश की जरूरत होती है। अब तक IGP को बाजार में वैसी सफलता नहीं मिली जैसी उम्मीद की गई थी, इसलिए रेगुलेटर अब इसे और अधिक आकर्षक बनाने की तैयारी में है।
नई कमेटी और क्या है मकसद?
SEBI ने इसके लिए एक खास वर्किंग ग्रुप बनाया है, जिसकी सह-अध्यक्षता 'इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन' (IVACA) और 'Accel Partners' के लीडर्स करेंगे। यह कमेटी इस बात का विश्लेषण करेगी कि वर्तमान लिस्टिंग और डिस्क्लोजर नॉर्म्स (Disclosure Norms) में कहां सख्ती है, जिसे कम करने की जरूरत है। इनका मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों पर है, जिनका बिजनेस मॉडल पारंपरिक कंपनियों से बिल्कुल अलग होता है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर काफी अहम है। अब तक IGP पर कामकाज काफी धीमा रहा है। अगर SEBI नियमों को आसान बनाता है और इन कंपनियों को मेन बोर्ड (Main Board) पर शिफ्ट होने का स्पष्ट रास्ता देता है, तो इससे वेंचर कैपिटल (VC) और प्राइवेट इक्विटी निवेशकों को अपना पैसा निकालने यानी एग्जिट का बेहतर मौका मिलेगा।
हालांकि, यहां जोखिम और सुरक्षा का एक बड़ा बैलेंस भी जरूरी है। डीप-टेक (Deep-tech) जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर में निवेश जोखिम भरा होता है। ऐसे में रेगुलेटर के सामने चुनौती यह है कि वह एंट्री बैरियर्स को कम तो करे, लेकिन साथ ही पब्लिक मनी की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। आने वाले समय में यह पैनल जो भी सिफारिशें देगा, वह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में नई कंपनियों की एंट्री और क्वालिटी पर सीधा असर डालेगी।
