SEBI ने 16 अक्टूबर से गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले का मकसद सोने की मांग को कंट्रोल करना और रुपये को मजबूती देना है। हालांकि, गोल्ड ETFs का कारोबार पहले की तरह जारी रहेगा।
पाबंदी के दायरे में क्या आएगा?
बाजार नियामक SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसों को निर्देश दिया है कि 16 अक्टूबर से गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स में किसी भी तरह का नया निवेश स्वीकार न करें। इस रोक के दायरे में लम्प-सम (lump-sum) निवेश के साथ-साथ SIP और STP के जरिए होने वाली निवेश की किश्तें भी शामिल हैं। यह कदम मुख्य रूप से सोने की बढ़ती मांग को कम करने और भारतीय रुपये पर दबाव को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
गोल्ड ETF पर कोई असर नहीं
आम निवेशकों के लिए अच्छी खबर यह है कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स यानी Gold ETFs पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ा है। निवेशक अभी भी अपने ब्रोकर के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर Gold ETFs की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल गोल्ड एसेट्स में 34% हिस्सा फंड-ऑफ-फंड्स का है, जबकि 66% हिस्सेदारी गोल्ड ETFs की है।
क्या है इसके पीछे की वजह?
नियामक ने Gold ETFs को इस दायरे से बाहर रखा है, क्योंकि इन्हें बंद करने से निवेशकों के लिए अपनी होल्डिंग्स बेचना मुश्किल हो जाता और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिलता। दिलचस्प बात यह है कि चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत में सोने के इंपोर्ट में 27.32% की गिरावट आई है और यह आंकड़ा $19.27 बिलियन पर रहा है। ऐसे में बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह के फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स पर लगाम लगाने से करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर बहुत मामूली असर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए अब क्या विकल्प?
जो निवेशक अब तक फंड-ऑफ-फंड्स के जरिए सोने में निवेश कर रहे थे, उन्हें अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। अगर आप आगे भी गोल्ड-लिंक्ड एसेट्स में बने रहना चाहते हैं, तो आपको डीमैट अकाउंट खोलकर गोल्ड ETFs का रास्ता चुनना होगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या निवेशक अपना पैसा ETFs में शिफ्ट करते हैं या गोल्ड में निवेश करना ही रोक देते हैं।
