बाजार नियामक SEBI ने Kore Digital के खिलाफ सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है। कंपनी पर ₹541 करोड़ के हेरफेर और फंड डायवर्जन का गंभीर आरोप है, जिसके चलते शीर्ष अधिकारियों को सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सेबी (SEBI) ने Kore Digital Limited के खिलाफ एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है। नियामक ने ₹541.3 करोड़ की संभावित वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 और 2026 से संबंधित हैं। यह राशि कंपनी के कुल रिपोर्ट किए गए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लगभग 73% है, जो कंपनी के वित्तीय दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अनियमितताओं की पूरी कहानी
सेबी की जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में फर्जी रेवेन्यू दिखाया था। नियामक ने ₹31.49 करोड़ के उन ट्रांजैक्शन्स पर सवाल उठाए हैं, जिनमें Vodafone, Bharti Airtel और Navayuga Engineering Company Limited जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, Kashvee Infra Projects Pvt. Ltd. के जरिए दिखाए गए ₹26.42 करोड़ के रेवेन्यू को भी संदिग्ध माना गया है। जांच में यह सामने आया कि इस इकाई का कोई वास्तविक बिजनेस नहीं था और यह अपने पते पर भी नहीं मिली।
साथ ही, मार्च 2024 में प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए जुटाए गए ₹40.05 करोड़ के फंड को भी फर्जी इकाइयों में डायवर्ट करने का आरोप है।
अब क्या होगा?
सेबी ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ और सीएफओ को पब्लिक फंड जुटाने और सिक्योरिटीज में लेनदेन करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। मामले की गहराई से जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया जाएगा, जो कंपनी के लिस्टिंग के समय से लेकर 31 मार्च 2026 तक की किताबों की जांच करेगा। साथ ही, ऑडिटर्स की भूमिका की जांच के लिए मामला नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) को भी भेजा गया है।
