SEBI ने Copthall Mauritius Investment और Mansi Share and Stock Broking को जनरल ट्रेडिंग की मंजूरी दे दी है। दोनों कंपनियों ने कथित तौर पर गलत तरीके से कमाए गए **₹3.68 करोड़** जमा कर दिए हैं।
भारी भरकम डिपॉजिट के बाद मिली राहत
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अपनी जांच के दायरे में आई इन दोनों कंपनियों को राहत देते हुए जनरल ट्रेडिंग शुरू करने की अनुमति दे दी है। कंपनियों को बाजार में वापसी के लिए उन लाभों को जमा करना पड़ा, जिन्हें रेगुलेटर ने संदिग्ध माना था। इसमें Copthall Mauritius Investment (JPMorgan की इकाई) ने ₹2.96 करोड़ और Mansi Share and Stock Broking ने ₹71.64 लाख का भुगतान किया है। कुल ₹3.68 करोड़ की राशि रेगुलेटर के पास जमा करा दी गई है।
क्यों घेरे में आई थीं कंपनियां?
यह मामला 13 अगस्त, 2026 को Sensex के Closing Auction Session (CAS) के दौरान हुई संदिग्ध ट्रेडिंग से जुड़ा है। SEBI की जांच में यह देखा जा रहा है कि दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच क्या इन कंपनियों ने जानबूझकर इंडेक्स के शेयरों के दाम में हेरफेर किया था। आशंका है कि इन ऑर्डर्स का मकसद अपने डेरिवेटिव्स पोजिशन को फायदा पहुंचाना था।
क्लोजिंग ऑक्शन पर अब भी तलवार
हालांकि कंपनियों को ट्रेडिंग की छूट मिल गई है, लेकिन वे अभी भी इक्विटी सेगमेंट के Closing Auction Session में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। यह पाबंदी अगले आदेश तक बनी रहेगी। यह एक बड़ा प्रतिबंध है क्योंकि क्लोजिंग ऑक्शन वह समय होता है जब इंस्टीट्यूशनल निवेशक अंतिम सेटलमेंट प्राइस पर ट्रेड करते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल SEBI की जांच PFUTP (Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices) नियमों के तहत जारी है। फिलहाल रेगुलेटर कंपनियों द्वारा दिए गए सबूतों और जवाबों की समीक्षा कर रहा है। अंतिम फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि क्या यह राशि स्थायी रूप से जब्त की जाएगी या इन कंपनियों पर और भी कड़े प्रतिबंध या जुर्माने लगाए जाएंगे।
