भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 1 अगस्त 2026 से स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से शेयर बायबैक (Share Buyback) का रास्ता फिर से खोल दिया है। नए नियमों के तहत, बायबैक राशि कंपनी की कुल पेड-अप कैपिटल का **15%** तक सीमित रहेगी और इसे **66** दिनों के भीतर पूरा करना होगा। कर का बोझ अब शेयरधारकों पर डाला गया है, जिससे पहले के कर संबंधी अड़चनें दूर हो गई हैं।
शेयर बायबैक की वापसी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि 1 अगस्त 2026 से कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज के ज़रिए खुले बाज़ार (Open Market) से अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी। यह फैसला बाज़ार में पूंजी प्रबंधन के लिए एक वैकल्पिक रास्ता फिर से खोलेगा। SEBI ने 2025 में इस सुविधा को बंद करने का फैसला किया था, जिसे अब इस नई नीति से पलट दिया गया है। यह कदम कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में सुविधा देने के साथ-साथ छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा।
बायबैक के लिए सख़्त नियम
नए नियमों के तहत, कंपनियों को कई कड़े नियमों का पालन करना होगा। बायबैक की कुल राशि कंपनी की पेड-अप कैपिटल (Paid-up Capital) और फ्री रिजर्व (Free Reserves) का 15% से ज़्यादा नहीं हो सकती। यह सीमा कंपनी की स्टैंडअलोन (Standalone) और कंसोलिडेटेड (Consolidated) दोनों वित्तीय स्थिति के आधार पर लागू होगी। बायबैक की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के लिए, SEBI ने इसे 66 कार्य दिवसों के भीतर समाप्त करने की समय-सीमा तय की है। कंपनियों को सार्वजनिक घोषणा के 4 कार्य दिवसों के भीतर बायबैक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इन बदलावों का मकसद बायबैक के दौरान होने वाली अनिश्चितता को कम करना है।
कर में बदलाव और शेयरधारकों पर असर
पहले 2025 में इस तरीके को बंद करने का मुख्य कारण यह था कि इसमें कर संबंधी विसंगतियां थीं और सभी शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार नहीं हो पा रहा था। पहले, कर का भुगतान कंपनी करती थी, जिससे बायबैक में भाग लेने और सामान्य बाज़ार में शेयर बेचने के बीच अंतर पैदा होता था। नए नियम के तहत, कर का भार अब सीधे उन शेयरधारकों पर आएगा जो बायबैक में हिस्सा लेंगे। उन्हें अपने कैपिटल गेन्स (Capital Gains) पर वैसे ही टैक्स देना होगा, जैसे वे सामान्य शेयर बिक्री पर देते हैं। इस बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि बायबैक के दौरान शेयर बेचने वाले और सामान्य बाज़ार में शेयर बेचने वाले निवेशक को कर के मामले में एक समान स्थिति मिले।
अतिरिक्त सुरक्षा उपाय और अनुपालन
बाज़ार की ईमानदारी बनाए रखने के लिए, SEBI ने कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी पेश किए हैं। बायबैक की पूरी अवधि के दौरान प्रमोटर (Promoter) और उनसे जुड़े लोगों के शेयरों को ISIN स्तर पर फ्रीज़ करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। इसके अलावा, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी घोषित बायबैक से न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) की आवश्यकता का उल्लंघन न हो। मर्चेंट बैंकर (Merchant Banker) की नियुक्ति को वैकल्पिक बना दिया गया है, जिससे कंपनियों की अनुपालन लागत कम होगी। हालांकि, अब निगरानी की ज़िम्मेदारी कंपनी के आंतरिक अनुपालन अधिकारी (Compliance Officer), वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) और संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों की होगी। कंपनियों को पारंपरिक अखबार के विज्ञापनों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी अपडेट देना होगा ताकि सभी निवेशकों तक जानकारी आसानी से पहुँच सके।
निवेशक अब देख सकते हैं कि कंपनियां अपनी आने वाली पूंजी आवंटन रणनीतियों (Capital Allocation Strategies) में इस फिर से शुरू की गई व्यवस्था का उपयोग कैसे करती हैं। इस नए ढांचे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां 66 दिन की सख़्त समय-सीमा को कितनी जल्दी अपनाती हैं और कर के बोझ में बदलाव आने वाले समय में नए बायबैक घोषणाओं की आवृत्ति को कैसे प्रभावित करता है।
