SEBI Reforms: मार्केट में बड़े बदलाव, AI और ब्रोकर्स के लिए आए नए नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI Reforms: मार्केट में बड़े बदलाव, AI और ब्रोकर्स के लिए आए नए नियम

बाजार नियामक SEBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में लिक्विडिटी बढ़ाने और AI के उपयोग को सुरक्षित बनाने के लिए कड़े नियम लागू करने का ऐलान किया है। इसके अलावा, ब्रोकर्स के लिए टियर्ड कंप्लायंस (tiered compliance) सिस्टम और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए फास्ट ट्रेड प्रोसेसिंग की सुविधा दी जा रही है।

मार्केट की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए SEBI ने अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया है। नियामक का मुख्य फोकस तीन बड़े क्षेत्रों पर है: लिक्विडिटी में सुधार, टेक्नोलॉजी सुरक्षा और ब्रोकर्स के लिए आसान नियम।

कॉर्पोरेट बॉन्ड और लिक्विडिटी पर जोर

मौजूदा समय में कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में इक्विटी मार्केट के मुकाबले ट्रेडिंग काफी धीमी रहती है। इसे बदलने के लिए SEBI एक 'मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क' ला रहा है, जिससे खरीदारों और विक्रेताओं के लिए बॉन्ड्स में ट्रेड करना सस्ता और तेज हो जाएगा। साथ ही, शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) के नियमों को भी रिफाइन किया जा रहा है ताकि मार्केट में वॉल्यूम बढ़ सके।

AI के लिए नया 'सैंडबॉक्स'

एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए, SEBI अब कंपनियों के लिए सख्त सुरक्षा मानक तय कर रहा है। कंपनियों को अपने सिस्टम में 'किल स्विच' (Kill Switch) जैसे सुरक्षा फीचर लगाने होंगे, जो किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में ट्रेडिंग प्रोग्राम को तुरंत बंद कर सकें। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक 'AI सैंडबॉक्स' बनाया जा रहा है, जहाँ कंपनियां रेगुलेटरी सुपरविजन में अपने टूल्स को टेस्ट कर सकेंगी।

ब्रोकर्स के लिए नई व्यवस्था

नियामक अब 'ग्रेटेड कंप्लायंस फ्रेमवर्क' लागू करने जा रहा है। इसके तहत ब्रोकर्स पर नियम उनके साइज और क्लाइंट बेस के हिसाब से तय होंगे। इससे छोटी फर्मों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा, जबकि बड़े और ज्यादा रिस्क वाले ब्रोकर्स पर निगरानी सख्त की जाएगी। इसके अलावा, एक यूनिफाइड डिजिटल पोर्टल भी लाया जा रहा है ताकि इंस्पेक्शन की प्रक्रिया तेज हो सके।

इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी राहत

PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) और AIF (अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स) जैसे बड़े संस्थानों के लिए ट्रेड प्रोसेसिंग को और आसान बनाया जा रहा है। 'ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप' सुविधा के विस्तार से मैनुअल कन्फर्मेशन का इंतजार खत्म होगा, जिससे फंड्स का डिप्लॉयमेंट कहीं ज्यादा इफेक्टिव तरीके से हो पाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.