SEBI ने प्राइवेटली लिस्टेड और इलिक्विड Infrastructure Investment Trusts (InvITs) में OFS के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड को **12 हफ्ते** से घटाकर **8 हफ्ते** कर दिया है। यह कदम बड़े निवेशकों को पोर्टफोलियो मैनेज करने में अधिक लचीलापन देने के लिए उठाया गया है।
क्या बदला है नियमों में?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने प्राइवेटली लिस्टेड InvITs के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बदलाव किया है। 2 नवंबर, 2026 से प्रभावी इस नए नियम के तहत, 'इलिक्विड' (illiquid) कैटेगरी वाले इंस्ट्रूमेंट्स में ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड अब 12 हफ्ते के बजाय केवल 8 हफ्ते का होगा।
कूलिंग-ऑफ पीरियड का महत्व
कूलिंग-ऑफ पीरियड वह समय है जिसके दौरान प्रमोटर्स या बड़े शेयरधारकों को OFS से पहले और बाद में यूनिट्स की खरीद-फरोख्त करने की मनाही होती है। अब समय सीमा कम होने से इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) अपने पोर्टफोलियो को अधिक तेजी से रीबैलेंस कर पाएंगे। पहले की 12 हफ्ते की लंबी अवधि के कारण कई बार निवेशकों की पूंजी ऐसे ट्रस्ट्स में फंस जाती थी जहां ट्रेडिंग वॉल्यूम पहले से ही कम है।
इलिक्विडिटी का बना रहेगा जोखिम
हालांकि SEBI का यह फैसला निवेशकों को राहत देता है, लेकिन InvITs के साथ जुड़ी बुनियादी समस्याएं अब भी कायम हैं। इन इंस्ट्रूमेंट्स में एंट्री बैरियर बहुत ऊंचे हैं और इनमें निवेश के लिए लाखों रुपये की जरूरत होती है। यही कारण है कि इनमें खरीदार और विक्रेता कम होते हैं और ये इलिक्विड बने रहते हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस नियम से निवेशकों को एग्जिट और रीबैलेंसिंग में तो आसानी होगी, लेकिन मार्केट डेप्थ (Market Depth) की कमी जैसी समस्याएं जस की तस हैं। कम संख्या में पार्टिसिपेंट्स होने के कारण OFS के बाद भी इन शेयर्स में भारी वोलैटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है।
