SEBI के CAS फ्रेमवर्क पर घमासान: 20,000 सुझावों के बाद अब बड़े बदलाव की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI के CAS फ्रेमवर्क पर घमासान: 20,000 सुझावों के बाद अब बड़े बदलाव की तैयारी

SEBI ने Closing Auction Session (CAS) के नए फ्रेमवर्क को लेकर करीब **20,000** सुझाव मांगे हैं। मार्केट में वोलेटिलिटी और लिक्विडिटी को लेकर निवेशकों और ट्रेडर्स की चिंताएं अब रेगुलेटर के फैसले पर टिकी हैं।

मार्केट में क्यों है हलचल?

अगस्त 2026 में लागू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर मार्केट पार्टिसिपेंट्स में काफी नाराजगी और संशय है। 3 अक्टूबर, 2026 तक रेगुलेटर को मिले 20,000 फीडबैक बताते हैं कि डेरिवेटिव्स मार्केट में सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया को लेकर ट्रेडर्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स काफी सतर्क हैं।

VWAP और हेजिंग की चुनौती

फिलहाल बहस इस बात पर है कि क्या मार्केट 'ब्लेंडेड वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस' (VWAP) मॉडल पर कायम रहेगा या पुरानी 'कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन' (CTS) पद्धति पर लौटेगा। आर्बिट्रेजर्स का कहना है कि ब्लेंडेड मॉडल में ट्रेड एग्जीक्यूट होने के बाद ही वजन (weights) का पता चलता है, जिससे रिस्क मैनेजमेंट और परफेक्ट हेजिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है।

क्या 3:30 बजे तक बढ़ेगा समय?

इस कंसल्टेशन में बाजार के समय और इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू की पारदर्शिता पर भी चर्चा हुई है। कई जानकारों का मानना है कि कंटीन्यूअस ट्रेडिंग को 3:30 बजे तक बढ़ाना कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच तालमेल बिठाने के लिए जरूरी है। वहीं, इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू को छिपाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध हो रहा है, क्योंकि निवेशकों का मानना है कि इससे पारदर्शिता खत्म हो जाएगी।

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने संकेत दिए हैं कि फीडबैक का विश्लेषण जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अब निवेशकों की नजर रेगुलेटर के उस अंतिम सर्कुलर पर है, जो तय करेगा कि भारतीय शेयर बाजार का क्लोजिंग भविष्य में कैसा होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.