SEBI का बड़ा फैसला: Mutual Fund डिस्ट्रीब्यूटर और एडवाइजर के बीच अब बनेगी स्पष्ट लकीर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: Mutual Fund डिस्ट्रीब्यूटर और एडवाइजर के बीच अब बनेगी स्पष्ट लकीर

SEBI म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स और इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए नई गाइडलाइन्स तैयार कर रहा है। इस कदम का मकसद रोल कन्फ्यूजन को खत्म करना और निवेशकों की सुरक्षा को और मजबूत करना है।

सलाह या बिक्री? अब सब होगा साफ

SEBI जल्द ही एक रिपोर्ट लाने जा रहा है, जो म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर और रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (RIA) के काम के दायरे को पूरी तरह अलग कर देगी। मुंबई में हुए 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' में SEBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज कुमार ने साफ किया कि कमीशन-आधारित बिक्री और फीस-आधारित सलाह के बीच चल रहे इस धुंधले फर्क को अब खत्म किया जाएगा।

क्यों है ये बदलाव जरूरी?

अभी स्थिति यह है कि कई बार निवेशक यह नहीं समझ पाते कि उन्हें जो सलाह दी जा रही है वह निष्पक्ष है या केवल कमीशन पाने के लिए कोई प्रोडक्ट बेचा जा रहा है। इसे ठीक करने के लिए रेगुलेटर अब 'लिमिटेड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस' या डिस्ट्रीब्यूटर्स को कुछ खास दर्जा देने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

डिजिटल मदद के लिए 'SEBI Setu'

रेगुलेटरी कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए SEBI 'SEBI Setu' नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहा है। इसके साथ ही, सभी इंटरमीडियरीज के लिए एक 'कॉमन एडवर्टाइजमेंट कोड' भी लाया जा रहा है, ताकि मार्केट में कम्युनिकेशन के स्टैंडर्ड्स तय हो सकें।

2026 तक बड़े बदलावों की तैयारी

यह कदम साल 2026 के बड़े रिफॉर्म्स का हिस्सा है। इसके अलावा, SEBI पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों को सरल बनाने और सेक्टरल व थीमैटिक इक्विटी स्कीमों के लिए 50% पोर्टफोलियो ओवरलैप की सीमा तय करने जैसे बड़े बदलावों पर भी काम कर रहा है। निवेशकों के लिए इन सुधारों का मतलब है—कम भ्रम और ज्यादा पारदर्शिता।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.