SEBI ने अपनी रेगुलेशन में बड़ा बदलाव करते हुए Vault Managers के दायरे को गोल्ड और सिल्वर ETFs और डेरिवेटिव्स तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, मिनिमम नेटवर्थ की शर्त को **₹50 करोड़** से बढ़ाकर **₹75 करोड़** कर दिया गया है।
बाजार की सुरक्षा और मानक में बदलाव
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 2021 के 'वॉल्ट मैनेजर्स रेगुलेशन' में संशोधन कर बुलियन मार्केट पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। अब तक यह नियम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) तक सीमित थे, लेकिन अब इनमें गोल्ड और सिल्वर ETFs के साथ-साथ बुलियन डेरिवेटिव्स को भी शामिल कर लिया गया है।
नेटवर्थ की सीमा में इजाफा
मार्केट की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए रेगुलेटर ने नेटवर्थ की अनिवार्य सीमा को ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹75 करोड़ कर दिया है। यह कदम इंडस्ट्री में बड़े और अधिक सक्षम खिलाड़ियों को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। जानकारों का मानना है कि इससे छोटे वॉल्ट मैनेजर्स के सामने चुनौती बढ़ सकती है, जिससे सेक्टर में कंसोलिडेशन (विलय) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
'बुलियन डिलीवरी स्टैंडर्ड्स' का नया दौर
SEBI ने पुरानी शब्दावली को बदलते हुए अब इसे 'बुलियन डिलीवरी स्टैंडर्ड्स' का नाम दिया है। इसका सीधा मकसद पूरे इकोसिस्टम में स्टोरेज और डिलीवरी के नियमों को एक समान बनाना है। नए आदेशों के तहत सुरक्षा प्रोटोकॉल को पहले से ज्यादा सख्त किया गया है, जिसमें साइबर हमलों, चोरी, धोखाधड़ी और आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए कड़े उपाय अनिवार्य होंगे।
अब हर वॉल्ट मैनेजर को अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स के लिए अलग अकाउंट्स और स्टोरेज लॉग्स का रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही, कंप्लायंस ऑफिसर्स की भूमिका को भी काफी महत्वपूर्ण कर दिया गया है ताकि ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स का सख्ती से पालन हो सके। रेगुलेटर की ओर से जल्द ही इन नियमों पर एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया जाएगा, जिस पर पूरे मार्केट की नजरें टिकी हुई हैं।
