SEBI और RBI अब फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर तेज कर रहे हैं और कॉर्पोरेट बॉन्ड लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए नए इंडेक्स ला रहे हैं। वहीं, ₹9.2 ट्रिलियन के पार पहुंची PMS इंडस्ट्री के लिए भी कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
भारतीय शेयर बाजार को आधुनिक बनाने के लिए SEBI और RBI ने कमर कस ली है। अब FPI के लिए पुरानी पेपर-आधारित रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया खत्म होगी और पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री करना बेहद तेज और आसान हो जाएगा।
बॉन्ड मार्केट में नई जान
नियामक अब एक्सचेंज-ट्रेडेड बॉन्ड इंडेक्स विकसित करने पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट में पारदर्शिता की कमी है, जिसे देखते हुए ये नए इंडेक्स बेंचमार्क का काम करेंगे। इससे बॉन्ड प्राइस मूवमेंट को ट्रैक करना आसान होगा और पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी को बढ़ावा मिलेगा।
PMS इंडस्ट्री पर कड़ी नजर
अमीरों की पसंदीदा निवेश सर्विस, PMS (Portfolio Management Services) का दायरा तेजी से बढ़ा है। साल 2016 में जो एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) महज ₹1.4 ट्रिलियन था, वह अब ₹9.2 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। यानी सालाना 20% की जोरदार ग्रोथ।
इतनी तेज वृद्धि को देखते हुए SEBI ने फंड मैनेजर्स के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब मैनेजर्स को एकाग्रता जोखिम (concentration risk), लिक्विडिटी और वोलेटिलिटी को लेकर अधिक स्पष्टता देनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सिर्फ पास्ट रिटर्न दिखाकर ही नहीं, बल्कि जोखिमों को समझाकर ही ग्राहकों का पैसा मैनेज किया जाए।
