SEBI ने मार्केट से जुड़ी कंपनियों के लिए नियमों को आसान बनाने के लिए एक यूनिफाइड एडवरटाइजिंग कोड का प्रस्ताव रखा है। इस नए नियम के तहत, कंपनियों को अब पहले से मंजूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी और सेलिब्रिटीज़ भी ब्रांड लेवल पर एंडोर्समेंट कर सकेंगे।
SEBI का बड़ा कदम, बदलेगा विज्ञापन का अंदाज़
सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने वित्तीय बाज़ार से जुड़ी सभी संस्थाओं के लिए विज्ञापन के नियमों को आधुनिक बनाने का ऐलान किया है। SEBI एक सिंगल, यूनिफाइड एडवरटाइजिंग कोड का प्रस्ताव लेकर आई है, जिसका मकसद पुराने और बिखरे हुए नियमों को हटाकर एक सुव्यवस्थित सिस्टम बनाना है। यह नया कोड डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।
फिलहाल, कंपनियों को अपने मार्केटिंग कैम्पेन लॉन्च करने से पहले स्टॉक एक्सचेंज या रेगुलेटर से मंज़ूरी लेनी पड़ती है, जिसमें काफी समय लग जाता है।
मंज़ूरी की झंझट ख़त्म, सीधा प्रसारण!
इस नए प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्री-अप्रूवल (पहले मंज़ूरी) की ज़रूरत ख़त्म कर दी जाएगी। मौजूदा नियमों के तहत, कंपनियों को विज्ञापन छापने या दिखाने से पहले रेगुलेटर से हरी झंडी लेनी होती है, जो डिजिटल कंटेंट की तेज़ी में मुश्किल खड़ी करता है। नए प्रस्ताव के अनुसार, कंपनियां विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद उसे रेगुलेटर के पास फाइल कर सकेंगी। इससे ब्रोकरेज हाउस, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय मध्यस्थों का काम आसान होगा और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी।
सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के नए नियम
SEBI वित्तीय विज्ञापनों में सेलिब्रिटीज़ और इन्फ्लुएंसर्स के इस्तेमाल पर भी ध्यान दे रही है। पहले इन पर लगी पाबंदियों की वजह से वित्तीय सेवाएं, दूसरी कंज्यूमर फील्ड्स के मुकाबले नुकसान में थीं। नए प्रस्ताव से अब सेलिब्रिटीज़ किसी ब्रांड या संस्था को कॉर्पोरेट लेवल पर एंडोर्स कर सकेंगे। हालांकि, छोटे निवेशकों (Retail Investors) की सुरक्षा के लिए, सेलिब्रिटीज़ को किसी खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट या इन्वेस्टमेंट स्कीम को एंडोर्स करने से रोका जाएगा। यह कदम ब्रांडिंग की ज़रूरत और जटिल वित्तीय उत्पादों के जोखिमों को कम करके दिखाने से रोकने की ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।
डिजिटल मीडिया पर भी कसा शिकंजा
नए नियमों में 'एडवरटाइजमेंट' की परिभाषा को भी बड़ा किया गया है ताकि डिजिटल चैनलों को पूरी तरह से कवर किया जा सके। इसमें इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, सोशल मीडिया पोस्ट्स और ऑनलाइन वीडियो कंटेंट भी शामिल हैं, जिन पर पहले प्रिंट या टेलीविज़न के मुकाबले कम सख़्त नियम थे। इस कोड में 5 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का ज़िक्र है, जो दिखाता है कि रेगुलेटर आधुनिक मार्केटिंग तरीकों पर भी नज़र रखना चाहता है।
हालांकि, यह ज़रूरी है कि रेगुलेटर डेटा वैलिडेशन को कैसे हैंडल करता है। अगर कंपनियों को परफॉरमेंस डेटा वेरिफाई करने के लिए कुछ ही मंज़ूरीशुदा एजेंसियों का इस्तेमाल करना पड़ा, तो कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है। यह देखना भी अहम होगा कि SEBI, SIP जैसे म्यूचुअल फंड को बढ़ावा देने वाले सामान्य इन्वेस्टर अवेयरनेस कैम्पेन और किसी खास फाइनेंशियल स्कीम के मार्केटिंग प्रयासों के बीच कैसे अंतर करेगा। इस कोड का अंतिम स्वरूप भविष्य में वित्तीय ब्रांड्स के कम्युनिकेशन के तरीके को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
