SEBI ने SME IPO के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब कंपनियों के लिए पिछले 3 साल का औसत ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम से कम **₹3 करोड़** होना जरूरी होगा, वहीं रिटेल निवेशकों के लिए मिनिमम एप्लिकेशन साइज को **₹2 लाख** से घटाकर **₹1 लाख** किया जा सकता है।
मुनाफे की नई शर्त और मार्केट कैप का गणित
SEBI ने SME सेगमेंट की क्वालिटी सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब तक कंपनियां पेड-अप कैपिटल के आधार पर लिस्ट होती थीं, लेकिन अब इसे 'मार्केट कैपिटलाइजेशन' के आधार पर तय किया जाएगा। जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू मार्केट वैल्यू ₹1,000 करोड़ तक होगी, उन्हें SME प्लेटफॉर्म पर ही लिस्ट होना होगा। वहीं, ₹1,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ के बीच की वैल्यू वाली कंपनियों के लिए यह विकल्प ऐच्छिक होगा।
मुनाफे को लेकर भी रेगुलेटर ने स्पष्टता दी है: पिछले 3 सालों में कंपनी का औसत ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम से कम ₹3 करोड़ होना अनिवार्य है। जो कंपनियां इस आंकड़े को नहीं छू पातीं, उन्हें कम से कम 75% हिस्सा QIBs (Qualified Institutional Buyers) से जुटाना होगा। यदि वे ऐसा नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें निवेशकों का पैसा वापस करना होगा।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
SEBI का लक्ष्य छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है। इसके लिए एप्लिकेशन साइज को ₹1 लाख करने और ट्रेडिंग लॉट को घटाकर 1 शेयर तक सीमित करने पर विचार चल रहा है। हालांकि, रेगुलेटर ने यह भी साफ किया है कि SME सेगमेंट में जोखिम मुख्य बोर्ड की तुलना में अधिक बना रहेगा।
अन्य अहम बदलाव
- General Corporate Purpose: फंड इस्तेमाल की ₹10 करोड़ की सीमा हटाई जा सकती है, लेकिन इश्यू साइज का 15% कैप बरकरार रहेगा।
- OFS लॉक-इन: ऑफर फॉर सेल (OFS) में भाग लेने वाले शेयरधारकों के लिए 1 साल का होल्डिंग पीरियड प्रस्तावित है।
इन प्रस्तावों पर 4 नवंबर, 2026 तक जनता से फीडबैक मांगा गया है।
