SEBI ने केंद्र सरकार को बजट से पहले बड़े सुझाव दिए हैं। विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए **12.5%** लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने की सिफारिश की गई है ताकि रिकॉर्ड **$31 बिलियन** की निकासी को रोका जा सके।
टैक्स राहत क्यों है जरूरी?
बाजार में जारी सुस्ती को खत्म करने के लिए SEBI ने सरकार को कुछ अहम सुझाव भेजे हैं। साल 2024 में भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड $31 बिलियन की निकासी हुई है, जिसने निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब बाजार रेगुलेटर चाहता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर लगने वाले 12.5% LTCG टैक्स को हटाकर विदेशी पूंजी को वापस भारत की ओर खींचा जाए।
डोमेस्टिक निवेशकों के लिए बड़ी खबर
रेगुलेटर ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी 'टैक्स-न्यूट्रल' स्विचिंग का प्रस्ताव दिया है। मौजूदा नियमों के तहत, एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा शिफ्ट करने पर तुरंत टैक्स लायबिलिटी बन सकती है। अगर नया नियम लागू होता है, तो 1 साल से ज्यादा समय तक यूनिट्स होल्ड करने वाले निवेशक बिना टैक्स की चिंता किए स्विच कर सकेंगे।
ग्लोबल बेंचमार्क बनाम भारतीय बाजार
पिछले 2 वर्षों में MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स ने 40% का रिटर्न दिया है, जबकि Nifty 50 में 4.8% की गिरावट आई है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि यदि यह टैक्स हटाया जाता है, तो निवेशकों के रिटर्न में 2.3% तक का उछाल आ सकता है।
सावधानी जरूरी
ये अभी केवल सुझाव हैं और अंतिम फैसला फाइनेंस मिनिस्ट्री को लेना है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सिर्फ टैक्स राहत ही काफी नहीं होगी, बल्कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और भारतीय रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। निवेशकों की नजर अब फरवरी 2027 में पेश होने वाले यूनियन बजट पर टिकी है।
