SEBI ने बजट से पहले सरकार को एक नया सुझाव दिया है, जिसके तहत 1 साल से ज्यादा समय तक होल्ड किए गए Mutual Fund यूनिट्स को स्विच करने पर कोई कैपिटल गेंस टैक्स नहीं लगेगा।
रेगुलेटर SEBI ने यूनियन बजट के लिए अपनी सिफारिशें पेश की हैं, जिसमें म्यूचुअल फंड निवेशकों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मान लेती है, तो 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड किए गए फंड्स को स्विच करने पर आपको टैक्स की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा शिफ्ट करने को 'सेल और परचेज' माना जाता है। इससे निवेशकों पर कैपिटल गेंस टैक्स का बोझ पड़ता है। अभी इक्विटी यूनिट्स पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है, अगर मुनाफा ₹1.25 लाख से ज्यादा हो। इस टैक्स के डर से कई निवेशक अपने खराब प्रदर्शन वाले फंड्स को भी नहीं बदल पाते, जिससे उनके पोर्टफोलियो पर असर पड़ता है।
ओवर-ट्रेडिंग का जोखिम
एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स-फ्री स्विच से 'पोर्टफोलियो चर्न' बढ़ सकता है। आसानी से स्विच करने के चक्कर में निवेशक बार-बार फंड्स बदलते रह सकते हैं, जो लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन में बाधा बन सकता है। इसे रोकने के लिए सुझाव यह है कि स्विच को पूरी तरह टैक्स-फ्री न करके 'टैक्स डेफरल' (Tax Deferral) माना जाए, यानी जब आप फाइनली रिडेम्पशन करें, तभी टैक्स की गणना हो।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, कानून नहीं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सुविधा सिर्फ एक ही फंड हाउस (AMC) के अंदर मिलेगी या अलग-अलग फंड हाउस के बीच भी। निवेशकों को फिलहाल टैक्स नियमों के बजाय अपने फंड के प्रदर्शन और अपनी रिस्क क्षमता के आधार पर ही फैसले लेने चाहिए।
