भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक परामर्श पत्र (consultation paper) पेश किया है जिसमें लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) विनियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया गया है। इसका उद्देश्य नॉन-कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज से संबंधित लावारिस राशियों को संभालने की प्रक्रिया को मानकीकृत करना है। वर्तमान SEBI विनियमों में एक विसंगति है जहाँ लावारिस ब्याज, चाहे मूलधन या डिबेंचर परिपक्व हुए हों या नहीं, सात साल बाद इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर किया जा सकता है। यह कंपनी अधिनियम, 2013 के विपरीत है, जो परिपक्वता तिथि से सात साल बाद ही IEPF में ट्रांसफर अनिवार्य करता है। इस समस्या को हल करने के लिए, SEBI LODR विनियमों के रेगुलेशन 61A(3) में संशोधन का प्रस्ताव करता है। नया प्रावधान यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी लावारिस राशि, जिसमें मूलधन और अर्जित ब्याज शामिल है, केवल डिबेंचर की परिपक्वता तिथि से सात साल की अवधि के बाद IEPF में ट्रांसफर की जाएगी। उन संस्थाओं के लिए जो कंपनी अधिनियम द्वारा शासित नहीं हैं, फंड को भी उसी अवधि के बाद SEBI के स्वयं के IEPF में ट्रांसफर किया जाएगा।
प्रभाव: इस नियामक सुधार से नॉन-कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जारी करने वाली सभी संस्थाओं के लिए लावारिस फंड के प्रबंधन के संबंध में एकरूपता आने की उम्मीद है। यह ट्रांसफर प्रक्रिया को स्पष्ट करके इन संस्थाओं के लिए व्यापार करने में आसानी (ease of doing business) को सुविधाजनक बनाएगा। निवेशकों के लिए, यह बदलाव फायदेमंद है क्योंकि उन्हें जारीकर्ता कंपनी से सीधे अपने फंड का दावा करने के लिए परिपक्वता के बाद सात साल की समर्पित अवधि मिलेगी, बजाय इसके कि उन्हें IEPF से संपर्क करना पड़े। यह पूंजी बाजारों में निवेशक सुरक्षा और विश्वास बढ़ाता है।
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कठिन शब्द:
नॉन-कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज (Non-convertible securities): वित्तीय साधन, जैसे डिबेंचर या बॉन्ड, जिन्हें जारी करने वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) विनियम (Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) Regulations): SEBI द्वारा निर्धारित नियम जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध कंपनियों के प्रकटीकरण (disclosures) और अन्य अनुपालन मामलों के संबंध में उनके दायित्वों को निर्दिष्ट करते हैं।
एस्क्रो खाता (Escrow account): एक तटस्थ तीसरे पक्ष द्वारा प्रबंधित एक अस्थायी खाता जहां धन या संपत्ति तब तक रखी जाती है जब तक कि किसी समझौते की सभी शर्तें पूरी न हो जाएं।
इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) (Investor Education and Protection Fund (IEPF)): कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित एक फंड, जिसका उद्देश्य निवेशक जागरूकता को बढ़ावा देना और निवेशक हितों की रक्षा करना है, विशेष रूप से कंपनियों से लावारिस फंड का प्रबंधन करके।
परिपक्वता तिथि (Maturity date): वह विशिष्ट तिथि जब ऋण साधन, जैसे बॉन्ड या डिबेंचर, धारक को मूलधन के पुनर्भुगतान के लिए देय हो जाता है।