SEBI ने सेटलमेंट फ्रेमवर्क को बेहतर बनाने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस प्रस्ताव में वित्तीय मल्टीप्लायर को कम करने और विवाद समाधान को आसान बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि रेगुलेटरी मामलों को निपटाना ज्यादा अनुमानित हो सके और कंपनियों की लागत कम हो।
SEBI का सेटलमेंट में बड़ा बदलाव
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने हाल ही में अपने सेटलमेंट नियमों में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। एक कंसल्टेशन पेपर के जरिए SEBI का लक्ष्य वर्तमान सेटलमेंट प्रक्रिया को बदलना है, जो अक्सर महंगा और जटिल साबित होता है। इसका मकसद मार्केट में काम करने वाली संस्थाओं के लिए लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय एक सुलभ समाधान का रास्ता खोलना है।
सेटलमेंट होगा सस्ता?
प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं में से एक है सेटलमेंट की लागत को कम करना। मौजूदा नियमों के तहत, सेटलमेंट की रकम अक्सर अंतिम पेनल्टी से काफी ज्यादा लगती थी, जो कई बार पेनल्टी का 8 गुना तक हो जाती थी। नए प्रस्ताव में इसे घटाकर पेनल्टी का लगभग 4 गुना करने का सुझाव है। इससे कंपनियों को कानूनी दांव-पेंच में फंसने के बजाय सेटलमेंट का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे समय और कानूनी खर्च दोनों बचेंगे।
अपीलीय स्टेज पर भी मिलेगा मौका
एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब संस्थाएं अपीलीय स्टेज, जैसे कि सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) या सुप्रीम कोर्ट में भी सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकेंगी। पहले, अगर मामला हाई कोर्ट तक पहुंच जाता था, तो सेटलमेंट के विकल्प सीमित हो जाते थे। इस नई सुविधा से लंबित कानूनी विवादों के समाधान का रास्ता खुल सकेगा।
आवेदन रद्द होने पर कम लगेगा शुल्क
यदि सेटलमेंट का आवेदन रद्द या वापस लिया जाता है, तो दोबारा आवेदन करने पर मौजूदा 50% अतिरिक्त शुल्क को घटाकर 20% करने का प्रस्ताव है। इससे कंपनियों के लिए दोबारा प्रयास करना आसान होगा। साथ ही, बार-बार एक ही तरह के उल्लंघन को एक ही अपराध माना जाएगा, जिससे डिफॉल्ट की गणना सरल हो जाएगी।
फाइलिंग फीस में मामूली बढ़ोतरी
जहां सेटलमेंट की कुल लागत को बेहतर फॉर्मूलों से कम करने का लक्ष्य है, वहीं बेसिक फाइलिंग फीस में मामूली बढ़ोतरी की गई है। व्यक्तियों के लिए यह ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 और अन्य संस्थाओं के लिए ₹25,000 से बढ़कर ₹35,000 हो जाएगी। इसके अलावा, SEBI अब औपचारिक शो-कॉज नोटिस जारी करने से पहले एक सेटलमेंट नोटिस प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे संस्थाओं को प्रक्रिया की शुरुआत में ही सेटलमेंट के लिए 60 दिन का समय मिलेगा।
ध्यान दें: यह अभी एक कंसल्टेशन पेपर है, इसलिए नियम अंतिम नहीं हैं। निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स को भविष्य में आने वाली आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए।
