भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों की शिकायतों के समाधान के तरीके में बड़ा बदलाव लाने का प्रस्ताव दिया है। अब प्राइवेट संस्थानों की जगह स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी निवेशकों के विवादों को सुलझाएंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।
Detailed Coverage
विवाद समाधान का नया ढांचा
SEBI ने ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) फ्रेमवर्क को फिर से डिजाइन करने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसके तहत, अब निवेशकों की शिकायतों का प्रशासनिक नियंत्रण अलग ODR संस्थानों से हटाकर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) जैसे BSE, NSE और डिपॉजिटरी को सौंपा जाएगा।
एक्सचेंज की भूमिका और फायदे
MIIs के पास पहले से ही ब्रोकर्स और लिस्टेड कंपनियों पर रेगुलेटरी कंट्रोल है। SEBI का मानना है कि इस एकीकरण से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक सुसंगत और कुशल बनेगी। SEBI ने इस प्रस्ताव पर जनता से 13 अगस्त 2026 तक राय मांगी है।
मध्यस्थों के चयन में निवेशकों को ताकत
प्रस्ताव में एक अहम बदलाव मध्यस्थों (Arbitrators) की नियुक्ति को लेकर है। अब निवेशक और संबंधित कंपनी दोनों ही अपनी पसंद के मध्यस्थों के नाम सुझा सकेंगे। MIIs कोशिश करेंगे कि दोनों की पसंद का मध्यस्थ मिले, और अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो एक सेंट्रल, निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे विवाद समाधान प्रक्रिया में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
तेज समाधान और वित्तीय सुरक्षा
SEBI, ODR फ्रेमवर्क को SEBI Complaints Redress System (SCORES) से सीधे जोड़ेगा। इससे अनसुलझी शिकायतों को मध्यस्थता तक पहुंचाने में लगने वाला समय लगभग 21 दिन कम हो सकता है। साथ ही, अगर कोई कंपनी मध्यस्थता अवार्ड के खिलाफ अपील करती है, तो उसे अवार्ड की पूरी राशि MII के पास जमा करानी होगी। इससे निवेशक के पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। शुरुआती राहत के तौर पर, MII निवेशक को अवार्ड राशि का 50% या ₹5 लाख (जो भी कम हो) अंतरिम राहत के रूप में दे सकेगा।
