SEBI का SME IPO पर बड़ा फैसला: अब निवेश करना होगा आसान, लेकिन लिस्टिंग के नियम होंगे सख्त

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का SME IPO पर बड़ा फैसला: अब निवेश करना होगा आसान, लेकिन लिस्टिंग के नियम होंगे सख्त

बाजार नियामक SEBI ने SME IPO के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब निवेश की न्यूनतम सीमा को घटाकर **₹1 लाख** किया जा सकता है, जबकि कंपनियों के लिए प्रॉफिट का क्राइटेरिया बढ़ाकर **₹3 करोड़** करने की तैयारी है।

निवेश के नियमों में बड़ा बदलाव

SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें SME प्लेटफॉर्म पर कामकाज के तरीकों को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव है। अब SME IPO के लिए मिनिमम एप्लीकेशन साइज को घटाकर वापस ₹1 लाख करने की योजना है, जबकि मार्च 2025 की पॉलिसी में इसे ₹2 लाख तक बढ़ा दिया गया था। इसके अलावा, लिक्विडिटी सुधारने के लिए नियामक अब लॉट साइज सिस्टम की जगह सिंगल-शेयर ट्रेडिंग मॉडल पर भी विचार कर रहा है।

कंपनियों के लिए सख्त शर्तें

रिटेल निवेशकों के लिए रास्ता आसान करने के साथ-साथ, नियामक कंपनियों की क्वालिटी पर भी ध्यान दे रहा है। नए प्रस्तावों के तहत, लिस्टिंग चाहने वाली कंपनियों को पिछले 3 फाइनेंशियल ईयर में औसत ₹3 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होगा। वर्तमान नियम में यह शर्त ₹1 करोड़ प्रॉफिट (पिछले 3 में से 2 साल में) की थी। इसके साथ ही, IPO के लिए अनिवार्य अलॉटीज (allottees) की संख्या को 200 से बढ़ाकर 500 किया जाएगा।

क्यों लिया गया यह कदम?

2012 से अब तक SME कंपनियों ने करीब ₹40,000 करोड़ जुटाए हैं, जिसमें से अधिकांश हिस्सा 2023 के बाद आया है। लेकिन इस तेजी के साथ SME स्टॉक्स में भारी रिस्क और स्पेकुलेशन (speculation) भी बढ़ा है। नियामक की कोशिश है कि ₹4,000 करोड़ से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों को मेनबोर्ड में माइग्रेट किया जाए ताकि SME प्लेटफॉर्म पर केवल मजबूत फाइनेंशियल आधार वाली कंपनियां ही बनी रहें। अभी यह एक प्रस्ताव है और अंतिम फैसला कंसल्टेशन प्रोसेस के बाद लिया जाएगा, जिस पर बाजार की पैनी नजर बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.