SEBI ने निवेशकों के लिए प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट को और आसान बनाने का ऐलान किया है। रेगुलेटर ने एक नई 'म्यूचुअल फंड-ओनली' पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) कैटेगरी का प्रस्ताव दिया है, जिसमें एंट्री के लिए न्यूनतम राशि को घटाकर ₹25 लाख कर दिया गया है। इसका मकसद मास-एफ्लुएंट यानी मध्यम-अमीर वर्ग के निवेशकों को फायदा पहुंचाना है। इस प्रस्ताव में फीस कैप (Fee Cap) और ऑपरेशनल नियमों को भी अपडेट किया गया है।
नई PMS कैटेगरी क्यों?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर एक खास 'म्यूचुअल फंड-ओनली' पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (MF-PMS) कैटेगरी का प्रस्ताव रखा है। इसका लक्ष्य पारंपरिक म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेश और सामान्य पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के बीच की खाई को पाटना है। यह कैटेगरी केवल म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान्स, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और विशेष निवेश फंड्स पर फोकस करेगी। यह प्रस्ताव 23 जुलाई, 2026 को जारी किया गया था और इस पर 13 अगस्त, 2026 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगी गई है।
एंट्री बैरियर और कैपिटल की शर्तें
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि न्यूनतम निवेश सीमा को घटाकर ₹25 लाख कर दिया गया है, जो कि पारंपरिक PMS स्कीम्स के लिए आवश्यक ₹50 लाख का आधा है। यह कदम उन मास-एफ्लुएंट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए है जो प्रोफेशनल गाइडेंस चाहते हैं लेकिन स्टैंडर्ड PMS के ऊंचे एंट्री बैरियर को पूरा नहीं कर पाते। साथ ही, इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाली फर्मों के लिए नेट वर्थ (Net Worth) की आवश्यकता को घटाकर ₹2 करोड़ करने का प्रस्ताव है, जो मौजूदा ₹5 करोड़ से काफी कम है। इससे छोटी इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों को शुरुआत करने में मदद मिल सकती है।
फीस स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल सहूलियत
SEBI ने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर फिक्स्ड मैनेजमेंट फीस को 2.5% तक सीमित रखने का सुझाव दिया है। रेगुलेटर इस बात पर भी उद्योग से राय मांग रहा है कि क्या इस कैटेगरी में परफॉर्मेंस-लिंक्ड फीस की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि मैनेजर व्यक्तिगत सिक्योरिटीज के बजाय म्यूचुअल फंड्स का चयन कर रहे हैं। ऑपरेशनल मोर्चे पर, प्रस्ताव में एक डेडिकेटेड डीलिंग रूम (Dealing Room) की आवश्यकता को खत्म करने और अतिरिक्त स्टाफ को वैकल्पिक बनाने जैसे नियमों को सरल बनाने का सुझाव है। इसके अलावा, निवेशकों पर दोहरे शुल्कों से बचने के लिए PMS-लेवल एग्जिट लोड (Exit Load) से छूट देने का भी प्रस्ताव है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें और टैक्स
हालांकि यह नई कैटेगरी म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के लिए अधिक प्रोफेशनल निगरानी का वादा करती है, निवेशकों को कुल लागत का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना होगा। MF-PMS मैनेजमेंट फीस के अलावा, निवेशकों को अंडरलाइंग म्यूचुअल फंड स्कीम्स के एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) को भी ध्यान में रखना होगा। टैक्स दक्षता (Tax Efficiency) भी एक महत्वपूर्ण विचार है; PMS स्ट्रक्चर के भीतर बार-बार रीबैलेंसिंग (Rebalancing) से फंड-ऑफ-फंड्स (FoF) रखने की तुलना में अलग टैक्स परिणाम हो सकते हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहां FoFs आम तौर पर सभी निवेशकों के लिए अधिक टैक्स-कुशल और सुलभ होते हैं, वहीं प्रस्तावित MF-PMS उन लोगों के लिए अधिक कस्टमाइजेशन (Customization) की सुविधा दे सकता है जिनकी वित्तीय जरूरतें अधिक जटिल हैं।
व्यापक रेगुलेटरी सुधार
कंसल्टेशन पेपर व्यापक PMS इंडस्ट्री को भी संबोधित करता है, जिसमें पारंपरिक PMS मैनेजर्स के लिए निवेश के विस्तृत विकल्प सुझाए गए हैं। इसमें मौजूदा लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) की सीमाओं के अधीन, विदेशी लिस्टेड इक्विटीज (Equities), विदेशी कर्ज (Debt) और विदेशी म्यूचुअल फंड में निवेश की संभावित अनुमति शामिल है। इसके अतिरिक्त, फंड मैनेजर्स को अधिक लचीलापन देने के लिए इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट (Unlisted Debt) और प्री-लिस्टिंग सिक्योरिटीज (Pre-listing Securities) में 10% आवंटन की अनुमति देने पर भी चर्चा हो रही है। इन नियमों का अंतिम कार्यान्वयन कंसल्टेशन अवधि के दौरान प्राप्त फीडबैक और SEBI द्वारा जारी किए जाने वाले किसी भी बाद के सर्कुलर पर निर्भर करेगा।
