SEBI डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। रेगुलेटर का लक्ष्य एक्सपायरी वाले दिन अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए 'कैश मार्केट क्लोजिंग प्राइस' की जगह 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस' (VWAP) का उपयोग करना है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव्स बाजार में सेटलमेंट के नियमों को बदलने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में, सेटलमेंट की प्रक्रिया मुख्य रूप से कैश मार्केट की क्लोजिंग प्राइस पर आधारित है। ट्रेडर्स अक्सर मार्केट बंद होने के आखिरी कुछ मिनटों में अपनी पोजीशन एडजस्ट करते हैं, जिससे बाजार में अचानक बड़ी हलचल देखने को मिलती है। इसी अस्थिरता को रोकने के लिए अब एक नए और अधिक स्थिर ढांचे पर चर्चा हो रही है।
VWAP का क्या है गणित?
रेगुलेटर का मुख्य प्रस्ताव क्लोजिंग प्राइस के बजाय VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) को लागू करना है। VWAP सिर्फ आखिरी भाव नहीं, बल्कि पूरे दिन के वॉल्यूम और प्राइस के औसत को देखता है। इससे आखिरी मिनट में होने वाले छोटे-मोटे ट्रेडों से बाजार के भाव में जो कृत्रिम तेजी या मंदी आती है, उस पर लगाम लगेगी।
क्या हैं दो मुख्य विकल्प?
SEBI ने इसके लिए दो तरीके सुझाए हैं:
- ब्लेंडेड VWAP: इसमें आखिरी 30 मिनट के ट्रेडिंग सेशन और 10 मिनट के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के डेटा का मिश्रण उपयोग होगा।
- सिर्फ आखिरी 30 मिनट: इसमें केवल नियमित ट्रेडिंग सेशन के अंतिम 30 मिनट के डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा।
और क्या बदलाव होंगे?
सेटलमेंट के अलावा, SEBI क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान लाइव इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू दिखाने की प्रक्रिया बंद करने पर विचार कर रहा है, जिससे सट्टेबाजी पर रोक लग सके। साथ ही, 1% के मौजूदा प्राइस बैंड के बाहर ऑर्डर देने वालों के लिए नियमों को और सख्त बनाया जा सकता है।
इन बदलावों का सीधा असर रिटेल और संस्थागत निवेशकों पर पड़ेगा, जिससे एक्सपायरी डे अधिक अनुमानित और सुरक्षित बन सके। फिलहाल, SEBI इस पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स और इंडस्ट्री से फीडबैक ले रहा है।
