SEBI: क्लोजिंग ऑक्शन के नियमों में होगा बदलाव, डेरिवेटिव मार्केट की वोलेटिलिटी पर लगेगी लगाम

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI: क्लोजिंग ऑक्शन के नियमों में होगा बदलाव, डेरिवेटिव मार्केट की वोलेटिलिटी पर लगेगी लगाम

SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के लिए कड़े नियमों का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य वीकली एक्सपायरी के दिन स्टॉक्स में होने वाली भारी उठा-पटक को कम करना है ताकि रिटेल इन्वेस्टर्स को नुकसान से बचाया जा सके।

बाजार की अस्थिरता पर लगाम

SEBI का प्रस्ताव क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के उस 15 मिनट (3:15 pm से 3:35 pm) के विंडो पर केंद्रित है, जहाँ अक्सर बड़ी हलचल देखी जाती है। रेगुलेटर का मानना है कि मौजूदा प्रक्रिया में कीमतों में हेरफेर की गुंजाइश रहती है, जिससे एक्सपायरी के दिन मार्केट अनस्टेबल हो जाता है।

प्रमुख बदलाव:

  • इंडिकेटिव वैल्यू हटाना: अब ऑक्शन के दौरान इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू नहीं दिखाई जाएगी। इससे ट्रेडर्स में होने वाला पैनिक कम होगा, क्योंकि उन्हें गलत संकेत नहीं मिलेंगे।
  • ऑर्डर कैंसिलेशन पर रोक: अगर कोई लिमिट ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से 1% से ज्यादा दूर है, तो उसे कैंसिल करने पर पाबंदी लगाने का सुझाव दिया गया है। इससे प्राइस मैनिपुलेशन रुकेगा।
  • सेटलमेंट प्राइस का नया गणित: अब सेटलमेंट प्राइस सिर्फ ऑक्शन प्राइस पर आधारित नहीं होगा। इसमें अंतिम 30 मिनट के ट्रेडिंग वॉल्यूम और ऑक्शन इक्विलिब्रियम प्राइस को मिलाकर 'वॉल्यूम-वेटेड' एवरेज निकाला जाएगा, जिससे प्राइस ज्यादा सटीक दिखेगा।

यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारतीय बाजार में इंडेक्स ऑप्शंस ट्रेडिंग में भारी उछाल आया है। रिटेल इन्वेस्टर्स का रुझान बढ़ने से एक्सपायरी के दिन रिस्क भी कई गुना बढ़ गया है। फिलहाल यह प्रस्ताव है और रेगुलेटर इसके औपचारिक सर्कुलर के आने के बाद इसे सिस्टम में लागू करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.