SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के लिए नए ड्राफ्ट नियम लाए हैं। अब ₹25 लाख के निवेश पर नए 'MF-only' PMS कैटेगरी में एंट्री मिलेगी, साथ ही प्री-IPO, ग्लोबल मार्केट और डेरिवेटिव्स में निवेश का दायरा बढ़ेगा।
Detailed Coverage
SEBI का बड़ा कदम: PMS नियमों में होंगे अहम बदलाव
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के रेगुलेटरी ढांचे को मजबूत करने के लिए ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किए हैं। यह कदम इंडस्ट्री में आए भारी उछाल को देखते हुए उठाया गया है। अप्रैल 2019 में जहां PMS इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹18.07 लाख करोड़ था, वहीं मई 2026 तक यह बढ़कर ₹42.61 लाख करोड़ हो गया। रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या भी बढ़कर 515 हो गई है, जिससे नियमों को अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
नई 'MF-only' कैटेगरी और ₹25 लाख की एंट्री
प्रस्तावों में एक अहम बदलाव 'MF-only' PMS कैटेगरी का ऐलान है। इस कैटेगरी के तहत, पोर्टफोलियो मैनेजर केवल म्यूचुअल फंड (MF) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के डायरेक्ट प्लान्स में ही निवेश कर पाएंगे। इन खास स्कीम्स के लिए SEBI ने मिनिमम एंट्री बैरियर को घटाकर ₹25 लाख करने का प्रस्ताव दिया है, जो फिलहाल स्टैंडर्ड PMS के लिए ₹50 लाख है। इसका मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा निवेशक मैनेज्ड इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का फायदा उठा सकें।
ग्लोबल और अनलिस्टेड मार्केट में निवेश का मौका
SEBI ग्राहकों के लिए निवेश के दायरे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव दे रहा है। ड्राफ्ट के मुताबिक, पोर्टफोलियो मैनेजर 'टू बी लिस्टेड' सिक्योरिटीज में भी निवेश कर सकेंगे, जिससे निवेशकों को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए तैयार कंपनियों में जल्दी निवेश का मौका मिल सकता है। इसके अलावा, डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजर क्लाइंट्स के एसेट्स का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट में भी लगा सकेंगे।
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो, रेगुलेटर विदेशी लिस्टेड इक्विटी, डेट और म्यूचुअल फंड में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव कर रहा है। यह निवेश फेमा (FEMA) गाइडलाइंस के तहत होगा और इसके लिए क्लाइंट की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। इन बदलावों से भारतीय PMS ऑफर्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाया जा सकेगा और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन में मदद मिलेगी।
डेरिवेटिव्स और कंप्लायंस के नियम
जोखिम को मैनेज करने और फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने के लिए, ड्राफ्ट एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स के इस्तेमाल पर कुछ सीमाएं तय कर रहा है। कुल डेरिवेटिव एक्सपोजर को क्लाइंट के AUM के 1.25 गुना तक सीमित रखने का प्रस्ताव है। इसमें, अनहेजेड शॉर्ट इक्विटी डेरिवेटिव पोजीशन के लिए AUM का 50% और ऑप्शन एक्सपोजर के लिए 10% की कैप का सुझाव दिया गया है। ये सुरक्षा उपाय निवेशकों को अत्यधिक लीवरेज से बचाने के लिए हैं।
नियमों की भाषा को सरल बनाकर और कंप्लायंस के बोझ को कम करके, SEBI का लक्ष्य एक अधिक कुशल इंडस्ट्री एनवायरनमेंट को बढ़ावा देना है। रेगुलेटर ने इन ड्राफ्ट प्रस्तावों पर 13 अगस्त 2026 तक पब्लिक कमेंट मांगे हैं। निवेशकों को SEBI की फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजार करना चाहिए ताकि इंप्लीमेंटेशन की आधिकारिक टाइमलाइन का पता चल सके और इंडस्ट्री फीडबैक के आधार पर इन प्रस्तावित थ्रेशोल्ड्स में कोई बदलाव होता है या नहीं।
