SEBI ने SME IPO के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब कंपनियों को मार्केट-मेकिंग और अंडरराइटिंग की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है, लेकिन लिस्टिंग के लिए मुनाफे की सीमा को बढ़ाकर **₹3 करोड़** कर दिया गया है।
लिस्टिंग का नया स्ट्रक्चर
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने SME (Small and Medium Enterprise) सेगमेंट के लिए नियमों को दुरुस्त करने का बड़ा खाका तैयार किया है। फिलहाल, SME IPOs में मार्केट-मेकिंग और 100% अंडरराइटिंग अनिवार्य है, जिसे अब हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसका मकसद कंपनियों पर अनुपालन (Compliance) का खर्च कम करना है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों को चिंता है कि मार्केट-मेकिंग हटने से शेयरों में लिक्विडिटी (Liquidity) का संकट पैदा हो सकता है, जिससे निवेशकों के लिए एग्जिट लेना मुश्किल हो सकता है।
मुनाफे की सख्त शर्तें
आसान लिस्टिंग के बदले में SEBI ने क्वालिटी चेक सख्त कर दिया है। अब किसी कंपनी को पब्लिक मार्केट में आने के लिए पिछले तीन सालों में कम से कम ₹3 करोड़ का औसत ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होगा। यह मौजूदा नियम (₹1 करोड़ पिछले दो साल) से काफी ज्यादा है, जिसका उद्देश्य सिर्फ मजबूत और स्थिर कंपनियों को ही बाजार में लाना है।
रिटेल निवेशकों के लिए राहत
वहीं, रिटेल पार्टिसिपेशन को बढ़ाने के लिए रेगुलेटर ने निवेश की न्यूनतम सीमा को घटाकर ₹1 लाख करने और सिंगल-शेयर लॉट में ट्रेडिंग की अनुमति देने का सुझाव दिया है।
बाजार की हलचल
यह फैसला ऐसे समय आया है जब SME मार्केट में जबरदस्त तेजी है। B2K Analytics के डेटा के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में BSE SME और NSE Emerge पर कंपनियों ने ₹3,791.67 करोड़ जुटाए हैं, जो पिछली तिमाही के मुकाबले लगभग दोगुना है। अब इन प्रस्तावों पर 4 नवंबर, 2026 तक जनता से राय मांगी गई है, जिसके बाद ही अंतिम गाइडलाइंस लागू होंगी।
