SEBI ने एक नया प्रस्ताव रखा है जिसके तहत कुछ कंपनियां अब मर्चेंट बैंकर को नियुक्त किए बिना छोटी वैल्यू का डेट (Debt) जारी कर सकेंगी। यह कदम कम जोखिम वाली और स्थापित कंपनियों के लिए कंप्लायंस कॉस्ट को घटाने के मकसद से उठाया गया है। हालांकि, यह छूट केवल **₹10,000** की फेस वैल्यू वाले डेट के लिए होगी और इसके लिए कंपनियों को कड़े वित्तीय मानकों को पूरा करना होगा।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 27 अगस्त, 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को सरल और सस्ता बनाना है। अब तक प्राइवेट डेट प्लेसमेंट के लिए मर्चेंट बैंकर को नियुक्त करना अनिवार्य था, जो इश्यू को मैनेज करने के साथ-साथ डिस्क्लोजर और नियमों की बारीकी पर नजर रखता है। छोटे इश्यूज के मामले में मर्चेंट बैंकर की फीस काफी बड़ी लागत बन जाती थी, जिसे कम करने के लिए यह पहल की गई है।
कौन सी कंपनियां होंगी योग्य?
यह छूट हर कंपनी को नहीं मिलेगी। SEBI ने इसके लिए कड़े मापदंड तय किए हैं:
- रेगुलेटरी ट्रैकिंग: कंपनी का पहले से किसी वित्तीय प्राधिकरण (Financial Authority) के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
- लिस्टिंग हिस्ट्री: कंपनी कम से कम 1 साल से किसी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होनी चाहिए।
- क्लीन रिकॉर्ड: कंपनी पर डिस्क्लोजर से जुड़ा कोई भी पेंडिंग फाइन या जुर्माना नहीं होना चाहिए।
वित्तीय मजबूती की कड़ी शर्त
केवल अच्छी वित्तीय सेहत वाली कंपनियां ही इस छूट का लाभ उठा सकेंगी। पिछले 3 फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने किसी भी कर्ज, ब्याज या डिविडेंड भुगतान में डिफॉल्ट नहीं किया होना चाहिए। इसकी पुष्टि ऑडिटर के सर्टिफिकेट से करनी होगी। साथ ही, इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स की क्रेडिट रेटिंग कम से कम AA- होनी चाहिए और इन्हें 'सीनियर, सिक्योर्ड एसेट' के तौर पर स्ट्रक्चर किया जाना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
अब तक मर्चेंट बैंकर एक 'गेटकीपर' के रूप में निवेशकों का भरोसा बढ़ाते थे। इस नियम के बाद अब सारा दारोमदार कंपनी के इंटरनल गवर्नेंस और ऑडिटर्स पर होगा। इस प्रस्ताव पर आम जनता 17 सितंबर, 2026 तक अपनी राय दे सकती है।
