SEBI का कड़ा रुख: IPO के पैसों में हेरफेर की तो फ्रीज होंगे प्रमोटर्स के Demat अकाउंट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SEBI का कड़ा रुख: IPO के पैसों में हेरफेर की तो फ्रीज होंगे प्रमोटर्स के Demat अकाउंट

बाजार नियामक SEBI ने IPO से जुटाई गई पूंजी के इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसके तहत नियम तोड़ने वाली कंपनियों के प्रमोटर्स के Demat अकाउंट्स को फ्रीज करने का प्रस्ताव दिया गया है।

सेबी (SEBI) ने सार्वजनिक निवेशकों से जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल को लेकर नियमों को सख्त करने की तैयारी कर ली है। रेगुलेटर का मकसद उन खामियों को बंद करना है, जिनका फायदा उठाकर कंपनियां IPO से मिले फंड की जानकारी देने में टालमटोल करती हैं।

अब क्या बदलेगा?

नया प्रस्ताव सभी IPO के लिए एक मॉनिटरिंग एजेंसी की नियुक्ति को अनिवार्य बनाता है। हालांकि कई कंपनियां पहले से ही इसका पालन करती हैं, लेकिन अब इसे और अधिक कठोर बनाया जा रहा है। ये एजेंसियां सीधे स्टॉक एक्सचेंज को रिपोर्ट करेंगी। यदि कोई कंपनी जरूरी दस्तावेज देने में सहयोग नहीं करती, तो उसे औपचारिक रूप से 'Non-cooperation' (असहयोग) घोषित कर दिया जाएगा।

प्रमोटर्स पर होगी बड़ी कार्रवाई

नियमों का पालन न करने पर कंपनियों को ₹50,000 का जुर्माना प्रति रिपोर्ट देना होगा। बात यहीं नहीं रुकेगी, यदि कंपनी 15 दिन तक डिफ़ॉल्ट में रहती है और अगले 10 दिनों तक भी जवाब नहीं देती, तो स्टॉक एक्सचेंज संबंधित प्रमोटर्स के Demat अकाउंट्स को फ्रीज करने का निर्देश दे सकते हैं। साथ ही, जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, कंपनी अपनी मॉनिटरिंग एजेंसी भी नहीं बदल पाएगी।

इन नियमों को ICDR से हटाकर LODR फ्रेमवर्क का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि IPO की निगरानी को केवल औपचारिकता न समझा जाए। यह कदम रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है ताकि कंपनियों द्वारा फंड के डायवर्जन (पैसे के गलत इस्तेमाल) के जोखिम को कम किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.