SEBI ने 3 अगस्त 2026 को शुरू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में सुधार का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद मार्केट की अस्थिरता (volatility) को कम करना और लिक्विडिटी बढ़ाना है। निवेशक 3 अक्टूबर 2026 तक इस पर अपनी राय दे सकते हैं।
सेटलमेंट प्राइस में बदलाव की तैयारी
डेरिवेटिव ट्रेडर्स के लिए सेटलमेंट प्राइस का तरीका बेहद अहम है। अभी यह अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर आधारित है। अब SEBI एक 'ब्लेंडेड' अप्रोच पर विचार कर रहा है, जिसमें अंतिम 30 मिनट की ट्रेडिंग और 10 मिनट के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोनों को शामिल किया जा सकता है। विकल्प के तौर पर, रेगुलेटर मौजूदा सिस्टम को एक और साल जारी रखने पर भी विचार कर रहा है ताकि मार्केट को नए माहौल में ढलने का समय मिले।
ऑर्डर कैंसिल करने पर लगेगी लगाम
मार्केट में हेरफेर रोकने के लिए SEBI ने ऑर्डर कैंसलेशन नियमों को सख्त करने का फैसला किया है। अब 1% से ज्यादा के रेफरेंस प्राइस वाले ऑर्डर को 'लॉक' कर दिया जाएगा, ताकि बड़े ऑर्डर्स को तुरंत कैंसिल करके कीमतों में कृत्रिम हलचल न पैदा की जा सके। इसके अलावा, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू (IIV) को क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान दिखाना बंद किया जा सकता है।
ट्रेडिंग टाइमिंग में दो विकल्प
SEBI ने मार्केट टाइमिंग के लिए दो सुझाव दिए हैं:
- पहला विकल्प: ट्रेडिंग विंडो को 3:30 PM तक बढ़ाना और डेरिवेटिव मार्केट को 3:45 PM तक चलाना।
- दूसरा विकल्प: मौजूदा 3:15 PM की कट-ऑफ और 3:30 PM की क्लोजिंग को बरकरार रखना।
इन सुझावों पर पब्लिक फीडबैक की प्रक्रिया जारी है और 3 अक्टूबर 2026 तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपनी राय दे सकते हैं।
