SEBI का नया फरमान: अब स्टॉक एक्सचेंजों को करना होगा **4 घंटे** का अनिवार्य 'टेक्निकल ड्रिल'

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का नया फरमान: अब स्टॉक एक्सचेंजों को करना होगा **4 घंटे** का अनिवार्य 'टेक्निकल ड्रिल'

SEBI ने मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के लिए डिजास्टर रिकवरी के नए नियम जारी किए हैं। इसमें अब नॉन-वर्किंग दिनों पर **4 घंटे** की अनिवार्य ड्रिल और कमोडिटी सेगमेंट के लिए IT कैपेसिटी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।

क्या है SEBI का नया प्लान?

सेबी (SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मुख्य मकसद मार्केट में तकनीकी खराबी (Technical Failure) के जोखिम को कम करना है। फिलहाल, इन संस्थानों को डिजास्टर रिकवरी (DR) के लिए लंबा समय देना पड़ता है, जिसे अब घटाकर 4 घंटे करने का प्रस्ताव है। यह ड्रिल अब केवल नॉन-वर्किंग दिनों पर ही की जाएगी ताकि ट्रेडिंग के घंटों में कोई रुकावट न आए।

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

खासकर कमोडिटी डेरिवेटिव सेगमेंट में, जहां ट्रेडिंग रात के 11:55 PM तक चलती है, सिस्टम मेंटेनेंस एक बड़ी चुनौती होती है। नए नियमों से एक्सचेंज अपना डेटा सेंटर आसानी से बैकअप साइट पर शिफ्ट कर सकेंगे। इसके अलावा, सेबी ने कमोडिटी एक्सचेंजों के लिए IT सिस्टम की क्षमता (Capacity) का नियम 4 गुना से घटाकर 2 गुना करने का सुझाव दिया है, जिससे कंपनियों का खर्च कम होगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

बाजार में तकनीकी ग्लिच या ट्रेडिंग हॉल्ट निवेशकों के लिए सबसे बड़ा डर होते हैं। सेबी के इस कदम से पूरा मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर ज्यादा मजबूत (Resilient) बनेगा। इससे हाई वोलेटिलिटी के दौरान भी ट्रेडिंग में रुकावट आने की संभावना कम हो जाएगी। फिलहाल, यह ड्राफ्ट 5 अक्टूबर 2026 तक पब्लिक कमेंट्स के लिए खुला है, जिसके बाद इसे फाइनल रेगुलेशन का रूप दिया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.