SEBI ने Demat और ट्रेडिंग अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए एक नया नियम प्रस्तावित किया है। अगर आपका अकाउंट **2 साल** से इनएक्टिव है, तो उसे 'डॉर्मेंट' (Dormant) माना जाएगा। इसका उद्देश्य फ्रॉड को रोकना और 'म्यूल अकाउंट्स' के दुरुपयोग पर लगाम लगाना है।
सुरक्षा के लिए नया नियम
बाजार नियामक SEBI का मानना है कि लंबे समय से बंद पड़े अकाउंट्स का गलत इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) के रूप में किया जा सकता है। इन अकाउंट्स का उपयोग अवैध ट्रांजेक्शन या फ्रॉड में होने का खतरा बना रहता है। इसीलिए SEBI अब 24 महीने यानी 2 साल की एक स्पष्ट समय सीमा तय करने जा रहा है। अगर इस दौरान कोई ट्रांजेक्शन नहीं होता है, तो अकाउंट को इनएक्टिव की श्रेणी में डाल दिया जाएगा।
क्या आपका पैसा सुरक्षित है?
निवेशकों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। अकाउंट के 'डॉर्मेंट' होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपके शेयर या फंड्स कहीं चले गए हैं। आपकी होल्डिंग्स पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। यह एक तरह का 'सेफ्टी लॉक' है। अकाउंट दोबारा चालू करने के लिए आपको बस दोबारा अपना KYC प्रोसेस पूरा करना होगा, जिसके बाद आप फिर से ट्रेडिंग शुरू कर पाएंगे।
क्यों लिया गया यह कदम?
फिलहाल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी मात्रा में ऐसे अकाउंट्स का बोझ है जो इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। इससे ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स की कंप्लायंस लागत भी बढ़ जाती है। SEBI की कोशिश है कि सिस्टम को साफ-सुथरा रखा जाए और केवल सक्रिय निवेशक ही मार्केट में बने रहें।
निवेशकों के लिए सलाह
फिलहाल किसी को भी घबराने या तुरंत एक्शन लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना बेहतर है कि आपके पास अपना सही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी रजिस्टर्ड हो ताकि किसी भी अपडेट की सूचना आपको तुरंत मिल सके। आने वाले समय में SEBI इस पर विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा कि डिविडेंड मिलना या लॉन्ग टर्म होल्डिंग जैसी गतिविधियों को 'एक्टिव' माना जाएगा या नहीं।
