SEBI का बड़ा ऐलान! AIF स्कीम्स अब 10 दिन में होंगी लॉन्च, कैपिटल फ्लो होगा तेज

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान! AIF स्कीम्स अब 10 दिन में होंगी लॉन्च, कैपिटल फ्लो होगा तेज
Overview

भारतीय रेगुलेटर SEBI ने Alternative Investment Fund (AIF) स्कीम्स लॉन्च करने की प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए 'GARUDA' नाम का एक नया मैकेनिज्म लाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम से AIF स्कीम्स के लॉन्च का समय मौजूदा **30** दिनों से घटकर महज **10** वर्किंग डेज़ रह जाएगा, जिससे तेज़ी से बढ़ते AIF सेक्टर में कैपिटल की तैनाती (capital deployment) को बढ़ावा मिलेगा।

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SEBI का 'GARUDA' मैकेनिज्म: AIF लॉन्च अब होंगे बेहद तेज

भारतीय सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने Alternative Investment Funds (AIFs) के लिए नई स्कीम लॉन्च करने की प्रक्रिया को क्रांतिकारी रूप से तेज करने हेतु 'GARUDA' (Green-Channel: AIF Rollout Upon Document Acknowledgement) नाम का एक नया सिस्टम लाने का प्रस्ताव दिया है।

इस प्रस्ताव के तहत, नई AIF स्कीम्स के लिए मौजूदा 30 दिन की प्रोसेसिंग टाइम को घटाकर सिर्फ 10 वर्किंग डेज़ करने का लक्ष्य है। इस पहल का मकसद कैपिटल को तेजी से अनलॉक करना और AIF इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को सपोर्ट करना है।

GARUDA सिस्टम के तहत, ज्यादातर AIF स्कीम्स अपने प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPMs) फाइल करने के 10 वर्किंग डेज़ के भीतर लॉन्च की जा सकेंगी, बशर्ते SEBI को कोई आपत्ति न हो। AIF की पहली स्कीम के लिए, रजिस्ट्रेशन या फाइलिंग के 10 वर्किंग डेज़ बाद, जो भी बाद की तारीख हो, लॉन्च की अनुमति मिल जाएगी।

यह कदम भारत के AIF सेक्टर के लिए बेहद अहम है, जो तेजी से बढ़ रहा है। 5 साल पहले जहां 732 रजिस्टर्ड AIFs थे, वहीं 31 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1,849 हो गई। कुल कमिटमेंट्स ₹15.74 लाख करोड़ तक पहुंच गई हैं, जिसमें से 31 दिसंबर 2025 तक ₹6.45 लाख करोड़ निवेश किए जा चुके हैं।

SEBI सिर्फ Accredited Investors (AI-only) और Angel Funds पर फोकस करने वाले फंड्स के लिए भी बड़ी राहतें दे रहा है। इन कैटेगरी के फंड मैनेजर्स सीधे SEBI के पास फाइल कर सकेंगे, उन्हें मर्चेंट बैंकर की ज़रूरत नहीं होगी और वे एक अंडरटेकिंग (undertaking) दे पाएंगे। सबसे खास बात यह है कि ये स्कीम्स सामान्य रिव्यू पीरियड को छोड़ कर, फाइलिंग के तुरंत बाद लॉन्च की जा सकती हैं।

यह माना गया है कि Accredited Investors हाई इनकम या नेट-वर्थ थ्रेशोल्ड को पूरा करते हैं और कॉम्प्लेक्स निवेशों का मूल्यांकन करने में सक्षम हैं। ऐसे निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो एक साल पहले 649 थी, वहीं 30 अप्रैल 2026 तक यह बढ़कर 2,773 हो गई। इन निवेशकों के पास 31 दिसंबर 2025 तक करीब ₹1.91 लाख करोड़ के AIF यूनिट्स थे, जो कुल AIF निवेश का लगभग 30% है।

भारतीय AIF मार्केट 2030 तक ₹100 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, और SEBI के ये बदलाव इस ग्रोथ पोटेंशियल को समर्थन देने के लिए रेगुलेटरी बाधाओं को कम करेंगे।

हालांकि, तेज लॉन्च टाइमलाइन कुछ चिंताएं भी बढ़ाती है। तेजी से अप्रूवल मिलने का मतलब है कि SEBI द्वारा शुरुआती जांच कम हो सकती है। रेगुलेटर पोस्ट-लॉन्च सैंपल बेसिस पर जांच की योजना बना रहा है, लेकिन तेज अप्रूवल से कुछ फंड मैनेजर्स द्वारा गलत जानकारी देने या मिसरिप्रेजेंटेशन (misrepresentation) का खतरा बढ़ सकता है। AI-only और Angel Funds के लिए सीधे फाइलिंग से मैनेजर्स और निवेशकों पर खुद से जोखिम का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। SEBI ने पहले भी AIFs के भीतर अप्रत्यक्ष लाभ (indirect access to benefits) और लोन एवरग्रीनिंग (loan evergreening) जैसे मुद्दों पर हस्तक्षेप किया है, जो लगातार सतर्कता की आवश्यकता को दर्शाता है।

SEBI ने इन प्रस्तावित बदलावों पर 1 जून तक जनता से कमेंट्स मांगे हैं, ताकि सुधारों को अंतिम रूप देने में सहयोग मिल सके। इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स को उम्मीद है कि भारत के AIF सेक्टर में लगातार मजबूत कैपिटल इनफ्लो के साथ ये बदलाव निवेश और इनोवेशन को और बढ़ावा देंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.