SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) ने 3 और 4 अगस्त, 2026 को हुई ट्रेडिंग पर जांच का ऐलान किया है। वजह? Nifty इंडेक्स में उस दौरान आई अचानक और बिना किसी स्पष्ट कारण वाली उछाल, खासकर तब जब एक्सचेंजों ने नई 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) लॉन्च की थी। रेगुलेटर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं कम लिक्विडिटी का फायदा उठाकर मार्केट में हेरफेर तो नहीं किया गया।
क्या है पूरा मामला?
SEBI ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से मिले ट्रेडिंग डेटा की समीक्षा शुरू कर दी है। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि 3 और 4 अगस्त, 2026 को Nifty इंडेक्स में जो बड़ी और अप्रत्याशित उछाल देखी गई, वह प्राकृतिक थी या फिर किसी सोची-समझी चाल का नतीजा।
नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन पर संदेह
मामला नई 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) से जुड़ा है। एक्सचेंजों ने 3 अगस्त से 208 डेरिवेटिव-ट्रेडेड स्टॉक्स के लिए यह नया सिस्टम शुरू किया था। इसका मकसद प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाना था। लेकिन, लॉन्च के कुछ ही दिनों के अंदर, 3 अगस्त को Nifty में करीब 201 पॉइंट और 4 अगस्त को 152 पॉइंट का उछाल CAS के दौरान ही देखा गया। इन तेज उछालों ने रेगुलेटर का ध्यान खींचा और उन्होंने एक्सचेंजों से पूरी ट्रेडिंग लॉग्स मांगी हैं।
कम लिक्विडिटी का खतरा
बाजार के जानकारों का मानना है कि CAS जैसे नए और कम लिक्विडिटी वाले सेशन में हेरफेर की संभावना बढ़ जाती है। अगर ऑक्शन में कम निवेशक भाग ले रहे हों, तो छोटे ट्रेड वॉल्यूम भी क्लोजिंग प्राइस पर बड़ा असर डाल सकते हैं। चिंता यह है कि कहीं कोई समूह या कुछ खास निवेशक इस 30 मिनट की विंडो का फायदा उठाकर इंडेक्स को कृत्रिम रूप से बढ़ाने की कोशिश तो नहीं कर रहे। हालांकि, यह साबित करना SEBI के लिए एक बड़ी चुनौती है कि क्या यह वाकई में मार्केट की अस्थिरता थी या फिर सिस्टम का फायदा उठाने की कोशिश।
आगे क्या?
SEBI स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि क्लोजिंग मैकेनिज्म की पवित्रता बनी रहे और किसी भी निवेशक को अनुचित लाभ न मिले। SEBI का फोकस हमेशा से सेटलमेंट के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने पर रहा है। अगर जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो SEBI नए नियम ला सकता है, ट्रेड एग्जीक्यूशन के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी कर सकता है या CAS फ्रेमवर्क में ही बदलाव कर सकता है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में रेगुलेटर की ओर से इस नीलामी प्रक्रिया में किसी भी बदलाव को लेकर आने वाली किसी भी आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए।
