SEBI Cash Market: शॉर्ट सेलिंग के नियम होंगे आसान! रिटेल निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI Cash Market: शॉर्ट सेलिंग के नियम होंगे आसान! रिटेल निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) जल्द ही कैश मार्केट में ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए स्टॉक लेंडिंग और बॉरोइंग (SLBM) के नियमों में ढील दे सकता है। यह कदम निवेशकों के लिए शॉर्ट सेलिंग को आसान बनाने और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के भारी नुकसान को कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

क्या हैं SEBI के नए प्लान?

SEBI, स्टॉक लेंडिंग और बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य कैश इक्विटी सेगमेंट में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग एक्टिविटी को बढ़ाना है। फिलहाल, भारत में शॉर्ट सेलिंग से जुड़े नियम ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुकाबले काफी सख्त हैं।

स्टॉक्स की लिस्ट बढ़ेगी, कोलेटरल होगा कम

SEBI के विचाराधीन प्रस्तावों में से एक यह है कि लेंडिंग और बॉरोइंग के लिए उपलब्ध स्टॉक्स की संख्या को लगभग दोगुना कर दिया जाए। इसके साथ ही, रेगुलेटर कोलेटरल की ज़रूरतों की भी समीक्षा कर रहा है। मौजूदा समय में, उधार लिए गए शेयरों के मूल्य का 130% तक कोलेटरल के तौर पर देना पड़ सकता है। SEBI इस ज़रूरत को घटाकर अंतरराष्ट्रीय मानकों (जो अक्सर 100% के आसपास होते हैं) के करीब लाने की कोशिश कर रहा है। इससे ट्रेडर्स और बड़े निवेशकों के लिए SLBM में भाग लेना सस्ता हो सकता है।

डेरिवेटिव्स के स्पेकुलेशन पर लगाम

यह कदम इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट से जुड़े जोखिमों को कम करने के बड़े रेगुलेटरी प्रयास का हिस्सा है। SEBI के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक डेरिवेटिव्स सेगमेंट में अपना पैसा गंवा रहे हैं। कैश मार्केट को हेजिंग और शॉर्ट सेलिंग के लिए एक आकर्षक और सुलभ प्लेटफॉर्म बनाकर, SEBI का लक्ष्य डेरिवेटिव्स पर निर्भरता कम करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आगे क्या?

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने शॉर्ट सेलिंग को लेकर सतर्क रुख अपनाया है, खासकर बाजार में अस्थिरता के दौर के बाद। 2017 से 2020 के बीच अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने के लिए नियमों को कड़ा किया गया था। पिछले कुछ सालों में भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्य काफी बढ़ा है, लेकिन डेरिवेटिव ट्रेडिंग की वॉल्यूम कैश मार्केट से कहीं ज्यादा तेज बढ़ी है। निवेशकों को इस साल के अंत तक रेगुलेटर की ओर से आने वाले अंतिम नोटिफिकेशन पर नज़र रखनी चाहिए। यह बदलाव बड़े निवेशकों के पोर्टफोलियो हेजिंग के तरीके और बाजार में गिरावट आने पर ट्रेडर्स के अप्रोच को प्रभावित कर सकता है।

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