सरकार SEBI के होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय का कार्यकाल **6 से 12 महीने** तक बढ़ाने की तैयारी में है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर बाजार में भारी विवाद और अनिश्चितता का माहौल है।
केंद्र सरकार रेगुलेटरी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए SEBI के होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय का कार्यकाल 6 से 12 महीने तक बढ़ाने का फैसला कर चुकी है। 1990 बैच के IRS अधिकारी वार्ष्णेय 2023 से सर्विलांस, एनफोर्समेंट और लीगल अफेयर्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाल रहे हैं। वहीं, दूसरे होल-टाइम मेंबर अमरजीत सिंह का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है, जिसे आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
क्यों सुर्खियों में है SEBI का CAS?
3 अगस्त 2026 को लागू किए गए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के बाद से ही इसे लेकर ट्रेडर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स में नाराजगी है। इंडेक्स एक्सपायरी वाले दिनों में 20 मिनट के इस विंडो के दौरान मार्केट में असामान्य उतार-चढ़ाव (Volatility) और कीमतों में अचानक उछाल देखा गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था पुरानी वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पद्धति के मुकाबले कम प्रभावी है।
ब्रोकरेज और ट्रेडर्स पर असर
नए क्लोजिंग प्राइस मैकेनिज्म के लागू होने के बाद से स्टॉकब्रोकर्स की फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग रेवेन्यू में 20% तक की गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, सिस्टम में हेरफेर की खबरें आने के बाद रेगुलेटर ने कुछ कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया है।
आगे क्या उम्मीद करें?
बढ़ते दबाव को देखते हुए 3 सितंबर 2026 को SEBI ने संकेत दिए हैं कि वे डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट कैलकुलेशन की समीक्षा कर रहे हैं। रेगुलेटर अगले एक हफ्ते में इस पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस पेपर में किए गए बदलाव सीधे तौर पर आपकी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी और बाजार की शॉर्ट-टर्म स्टेबिलिटी को प्रभावित करेंगे।
