SEBI अब मार्केट में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मार्केट रेगुलेटर SME IPO की निगरानी बढ़ाने, कॉर्पोरेट बॉन्ड में लिक्विडिटी लाने और AI के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए नए फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है।
भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹472 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है और 15 करोड़ से ज्यादा यूनिक इन्वेस्टर्स के साथ बाजार अब पूरी तरह बदल रहा है। इस तेजी को देखते हुए SEBI अब अपनी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को पूरी तरह आधुनिक बनाने में जुटा है। चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के अनुसार, रेगुलेटर का मुख्य लक्ष्य अब मैन्युअल कामकाज को घटाकर ऑटोमेटेड सिस्टम्स को बढ़ावा देना है।
SME IPO पर सख्त निगरानी
पिछले कुछ समय में SME कंपनियों के IPO में आई बाढ़ को देखते हुए SEBI अब इनके गवर्नेंस और डिस्क्लोजर नियमों की बारीकी से ऑडिट कर रहा है। मकसद साफ है—छोटी कंपनियों को पूंजी तो मिले, लेकिन साथ ही रिटेल इन्वेस्टर्स को हाई-रिस्क वाले ऑफरिंग्स से भी बचाया जा सके।
बॉन्ड मार्केट में बढ़ेगी लिक्विडिटी
इक्विटी के मुकाबले बॉन्ड मार्केट में रिटेल भागीदारी हमेशा से कम रही है। इसे बदलने के लिए SEBI 'फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स' ला रहा है, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बॉन्ड में ट्रेड करना आसान होगा। इसके अलावा, Demat 2.0 पायलट प्रोजेक्ट का दूसरा फेज जल्द शुरू होगा, जिसमें टोकनाइज्ड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की ट्रेडिंग संभव हो सकेगी।
AI का होगा इस्तेमाल
SEBI अब फिनटेक कंपनियों के लिए एक AI सैंडबॉक्स बनाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नई तकनीकों को पब्लिक करने से पहले एक सुरक्षित दायरे में टेस्ट किया जा सके।
हालांकि, एक चुनौती वित्तीय साक्षरता की भी है, क्योंकि सिर्फ 36% निवेशकों को ही मार्केट की गहरी समझ है। इसलिए, SEBI अपनी तकनीकी बदलावों के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि निवेशक गलत जानकारी या रिस्की दांव से बच सकें। आने वाले महीनों में SEBI के सर्कुलर पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि वहीं से नए नियमों की पूरी तस्वीर साफ होगी।
